MP में निगम-आयोगों में 70 पदाधिकारियों की नियुक्ति के 6 महीने में पेश होगा रिपोर्ट कार्ड, तय होगा फिट या अनफिट

MP News: सरकार का मानना है कि निगम, मंडल और बोर्ड केवल प्रशासनिक संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि शासन और जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी भी हैं. इसलिए पदाधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने-अपने विभागों की योजनाओं की जमीनी मॉनिटरिंग करें.
mp report cards of Corporation and Commission office bearers will be presented

सांकेतिक तस्वीर

MP News: मध्य प्रदेश में हाल ही में निगम, मंडल, बोर्ड और आयोगों में नियुक्त किए गए 70 से अधिक अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और पदाधिकारियों के लिए आने वाले छह महीने किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होंगे. सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इन नियुक्तियों को केवल राजनीतिक समायोजन नहीं माना जाएगा बल्कि इनके कामकाज का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा. प्रत्येक छह माह में उनके प्रदर्शन का रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा. जिसके आधार पर उनकी सक्रियता, जनहित से जुड़े कार्यों और संगठनात्मक योगदान का आकलन किया जाएगा.

जनसमस्याओं के निराकरण की भी निगरानी होगी

सरकार ने पदाधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए एक नई व्यवस्था बनाई है. इसके तहत संबंधित विभागों और संस्थाओं के कामकाज की समीक्षा के साथ वित्तीय प्रबंधन, योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसमस्याओं के निराकरण की भी निगरानी होगी. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में भोपाल स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में आयोजित उन्मुखीकरण कार्यक्रम में साफ कहा था कि सभी पदाधिकारियों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी होगी.

सरकार का मानना है कि निगम, मंडल और बोर्ड केवल प्रशासनिक संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि शासन और जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी भी हैं. इसलिए पदाधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने-अपने विभागों की योजनाओं की जमीनी मॉनिटरिंग करें. जनता की समस्याओं को समझें और उनके समाधान के लिए पहल करें. यही कारण है कि नियुक्तियों के तुरंत बाद उन्हें प्रशिक्षण देकर उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया गया. ऐसे में आने वाले छह महीने इन नेताओं के लिए परीक्षा की पहली कसौटी साबित होंगे.

संगठन करेगा फेल पास का रिव्यू

उन्हें एक ओर अपने विभागों के कामकाज में दक्षता दिखानी होगी, तो दूसरी ओर संगठन की अपेक्षाओं पर भी खरा उतरना होगा. छह माह बाद बनने वाला उनका रिपोर्ट कार्ड ही तय करेगा कि वे सरकार और संगठन की नजर में कितने सफल साबित हुए हैं.

विधानसभा चुनाव में रहेगी सक्रिय भूमिका

इन पदाधिकारियों के सामने चुनौती केवल विभागीय कामकाज तक सीमित नहीं है. भाजपा संगठन ने उन्हें आगामी नगरीय निकाय और 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी में भी सक्रिय भूमिका निभाने की जिम्मेदारी सौंपी है. सूत्रों के अनुसार, नियुक्ति से पहले ही कई नेताओं से यह स्पष्ट कर दिया गया था कि निगम-मंडल के पद संगठनात्मक जिम्मेदारी के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें विधानसभा टिकट की दावेदारी से दूर रहकर संगठन को मजबूत करना होगा.

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गुटबाजी को लेकर भी पार्टी करेगी फैसला

भाजपा की रणनीति के अनुसार अधिकांश पदाधिकारियों को उनके गृह जिले या पसंदीदा विधानसभा क्षेत्र से दूर संगठनात्मक जिम्मेदारी दी जाएगी. पार्टी उन क्षेत्रों पर विशेष फोकस कर रही है, जहां पिछले चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा था या संगठन अपेक्षाकृत कमजोर है. माना जा रहा है कि बाहरी नेताओं की तैनाती से स्थानीय गुटबाजी कम होगी और संगठन को मजबूत करने में मदद मिलेगी.

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