नर्सिंग कॉलेज भर्ती मामला: MPESB ने हटाई 100 फीसदी महिला आरक्षण की शर्त, अब पुरुष भी कर सकेंगे आवेदन

MP News: भर्ती में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण के खिलाफ अनेक पात्र पुरुष उम्मीदवारों ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया. याचिका में भर्ती प्रक्रिया को संविधान और प्रचलित नियमों के विरुद्ध बताते हुए इसे चुनौती दी गई थी.
Madhya Pradesh Employees Selection Board (File Photo)

मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (फाइल फोटो)

MP News: मध्य प्रदेश के शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में अकादमिक पदों पर भर्ती को लेकर चल रहा विवाद आज की सुनवाई के बाद समाप्त हो गया है. हाई कोर्ट में दायर याचिकाओं पर सुनवाई के उपरांत कर्मचारी चयन बोर्ड ने भर्ती विज्ञापन में संशोधन जारी करते हुए पुरुष उम्मीदवारों को भी आवेदन की अनुमति दे दी है.

MPESB ने 100 फीसदी आरक्षण की शर्त हटाई

इसके साथ ही पहले लागू की गई 100 प्रतिशत महिला आरक्षण की शर्त हटा दी गई है. अब पुरुष उम्मीदवार 13 जनवरी तक इन पदों के लिए आवेदन कर सकेंगे. संशोधित विज्ञापन जारी होने के बाद प्रदेश भर के पात्र पुरुष अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है. दरअसल, 16 दिसंबर को जारी भर्ती विज्ञापन में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत प्रदेश के शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में कुल 286 अकादमिक पदों पर सीधी भर्ती निकाली गई थी. इनमें 40 पद एसोसिएट प्रोफेसर, 28 पद असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 पद सिस्टर ट्यूटर के थे.

क्या है पूरा मामला?

इस विज्ञापन में सभी 286 पदों को पूर्णतः महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया था. इसके चलते योग्य पुरुष उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर हो गए थे. भर्ती में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण के खिलाफ अनेक पात्र पुरुष उम्मीदवारों ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया. याचिका में भर्ती प्रक्रिया को संविधान और प्रचलित नियमों के विरुद्ध बताते हुए इसे चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा (महिलाओं की नियुक्ति के लिए विशेष उपबंध) नियम, 1997 के तहत महिलाओं को शासकीय सेवाओं में अधिकतम 35 प्रतिशत आरक्षण ही दिया जा सकता है.

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इसके बावजूद विभाग द्वारा सभी पद महिलाओं के लिए आरक्षित करना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है. याचिका में यह भी कहा गया कि विभागीय भर्ती नियमों और इंडियन नर्सिंग काउंसिल के मापदंडों में लिंग के आधार पर किसी प्रकार के भेदभाव की अनुमति नहीं है. इसके बावजूद लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 100 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू कर संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन किया है.

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