नवरात्र के बीच इंदौर की सियासत में घमासान, महिला सम्मान को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच छिड़ी बहस

इंदौर: कांग्रेस की नई कार्यकारिणी में महिलाओं को जगह न मिलने पर बीजेपी ने तीखा हमला बोला है और कांग्रेस को महिला विरोधी पार्टी तक करार दे दिया है.
फाइल फोटो

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Navratri 2026: शक्ति के पर्व नवरात्र के बीच इंदौर की सियासत में महिला सम्मान को लेकर घमासान छिड़ गया है. शहर कांग्रेस की नई कार्यकारिणी में महिलाओं को जगह न मिलने पर बीजेपी ने तीखा हमला बोला है और कांग्रेस को महिला विरोधी पार्टी तक करार दे दिया है. वही कांग्रेस ने भी बीजेपी पर पलटवार कर बता दिया कि महिलाओं के लिए आरक्षण की बात कांग्रेस ने ही की है. कांग्रेस की सूची में 2 महिला आमंत्रित सदस्य होने की बात कही है.

कांग्रेस की कार्यकारिणी को लेकर अब राजनीति तेज

इंदौर में शहर कांग्रेस की कार्यकारिणी को लेकर अब राजनीति तेज हो गई है, बीजेपी ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि कार्यकारिणी में महिलाओं को स्थान न देकर पार्टी ने अपनी मानसिकता उजागर कर दी है. उन्होंने कहा कि नवरात्र जैसे पावन पर्व में, जब पूरे देश में मातृशक्ति की पूजा हो रही है,.

बीजेपी नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कांग्रेस पर लगाए आरोप

तब इंदौर में कांग्रेस द्वारा महिलाओं को नजरअंदाज करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. बीजेपी नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है जब पार्टी पर महिला विरोधी होने के आरोप लगे हैं, उन्होंने कहा कि पहले भी कांग्रेस नेताओं के बयानों में महिलाओं के प्रति असम्मान झलकता रहा है और अब संगठन में उन्हें जगह न देकर यह साफ हो गया है कि कांग्रेस महिलाओं को हाशिए पर रखना चाहती है.

बीजेपी के नेता महिला अधिकारियों का अपमान कर रहे है

वहीं इस मामले शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे का कहना है कि बीजेपी एक ऐसी पार्टी है जिसके नेता महिला अधिकारियों का अपमान कर रहे है. वो कांग्रेस पर आरोप लगा रहे है जबकि बीजेपी के राज में ही सबसे अधिक महिलाओ पर अत्याचार हो रहे है. कांग्रेस ऐसी पार्टी है जिसने पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और पहली महिला आईपीएस किरण बेदी दी है.

इस मुद्दे पर इंदौर की सियासत गरमा

फिलहाल, महिलाओं को संगठन में प्रतिनिधित्व देने के मुद्दे पर इंदौर की सियासत गरमा गई है. नवरात्र के बीच उठा यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है. क्योंकि अब यह मुद्दा सीधे महिला सम्मान और राजनीतिक सोच से जुड़ गया है.

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