‘खाकी’ को खुली चुनौती! मऊगंज में कलेक्टर, SP ऑफिस के सामने पुलिस की गाड़ियों से बैट्रियां चोरी
पुलिस की गाड़ियों से बैट्री चोरी.
MP News: मऊगंज जिले में चोरों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब उन्हें न कानून का भय दिखाई देता है और न ही पुलिस की मौजूदगी का. बीती रात हुई एक घटना ने जिले की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिले के सबसे संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले प्रशासनिक परिसर में, जहां नीचे कलेक्ट्रेट कार्यालय और ऊपर पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय संचालित होता है, वहीं खड़ी सरकारी पुलिस गाड़ियों से अज्ञात चोर बैटरियां निकालकर फरार हो गए.
अंधेरे में पुलिस की दो गाड़ियों की बैट्रियां निकालीं
जानकारी के अनुसार, रात के अंधेरे में चोरों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के ठीक सामने खड़ी पुलिस की दो सरकारी गाड़ियों (डग्गा) की बैटरियां निकाल लीं. इतना ही नहीं, तीसरी गाड़ी को भी निशाना बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी कारणवश चोर उसमें सफल नहीं हो सके. यह पूरी घटना ऐसे स्थान पर हुई, जहां सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और नियमित रात्रि गश्त होने का दावा किया जाता है. इसके बावजूद चोर बिना किसी भय के वारदात को अंजाम देकर निकल गए.
सुबह खुली चोरी की पोल, पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
सुबह जब ड्यूटी पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने सरकारी वाहनों की स्थिति देखी तो पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. सरकारी वाहनों से बैटरियां गायब मिलने की सूचना तेजी से अधिकारियों तक पहुंची. इसके बाद अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
सूत्रों के अनुसार, एक वाहन में तत्काल नई बैटरी लगवाकर उसे चालू कराया गया, जबकि दूसरी गाड़ी को धक्का देकर स्टार्ट किया गया और बिना बैटरी के ही कंट्रोल रूम के सामने खड़ा कर दिया गया. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है.
थाने में आवेदन, लेकिन एफआईआर दर्ज होने पर सवाल
जानकारी यह भी सामने आई है कि एसपी कार्यालय के एक कर्मचारी द्वारा मऊगंज थाने में घटना की लिखित सूचना दी गई. हालांकि, खबर लिखे जाने तक इस मामले में एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि नहीं हो सकी. यदि वास्तव में एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आम नागरिकों के मामलों में त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा करने वाला तंत्र अपने ही मामले में विलंब क्यों कर रहा है.
सीसीटीवी और रात्रि गश्त की प्रभावशीलता पर प्रश्न
घटना ने जिले की सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस परिसर को सबसे सुरक्षित माना जाता है, जहां चौबीसों घंटे पुलिसकर्मियों की आवाजाही रहती है और आधुनिक निगरानी व्यवस्था होने का दावा किया जाता है, वहां से सरकारी वाहनों के पुर्जे चोरी हो जाना चिंता का विषय है.
जनता का भरोसा और पुलिस की चुनौती
यह घटना केवल सरकारी बैटरियों की चोरी नहीं है, बल्कि कानून-व्यवस्था पर जनता के भरोसे की भी परीक्षा है. आम लोगों का कहना है कि यदि पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर कार्यालय के सामने खड़े सरकारी वाहन भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक अपने घरों, दुकानों और वाहनों की सुरक्षा को लेकर कैसे निश्चिंत रहें?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं में त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक होती है. यदि घटना में किसी प्रकार की सुरक्षा चूक सामने आती है, तो उसकी भी समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
पुलिस की कार्रवाई पर सबकी निगाहें
फिलहाल अज्ञात आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर बताए जा रहे हैं. पूरे जिले की नजर अब इस बात पर टिकी है कि पुलिस सीसीटीवी फुटेज, अन्य उपलब्ध साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों तक कितनी जल्दी पहुंचती है. साथ ही, यदि एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, तो उस संबंध में भी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है.
इस घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि अपराधी अवसर तलाशते हैं और सुरक्षा व्यवस्था की हर कमजोरी का लाभ उठाने की कोशिश करते हैं. ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष जांच और प्रभावी कार्रवाई न केवल चोरी का खुलासा करने के लिए, बल्कि जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण होगी.
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