Mauganj: जन विश्वास शिविर में खुली शिक्षा व्यवस्था की पोल! भोजन करने के बाद थालियां धोते दिखे बच्चे, शिकायत के बाद पहुचें कलेक्टर

Mauganj News: मऊगंज कलेक्टर अधिकारियों के साथ करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर विद्यालय पहुंचे. वहां जो नजारा दिखाई दिया, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए. बच्चे जर्जर भवन में चटाइयों पर बैठकर पढ़ाई कर रहे थे.
The children washed their plates at school after the meal.

भोजन के बाद स्‍कूल में बच्‍चों ने धोई थाली

Mauganj News: मऊगंज जिले के रतनगवां में आयोजित मुख्यमंत्री जन विश्वास शिविर उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब एक स्कूल की शिकायत ने प्रशासन को सीधे जमीनी हकीकत से रूबरू करा दिया. जिले के सभी वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी शिविर में मौजूद थे, लेकिन शायद किसी ने यह नहीं सोचा था कि स्कूल का निरीक्षण शिक्षा व्यवस्था की इतनी भयावह तस्वीर सामने लाएगा.

स्कूल पहुंचते ही सामने आई बदहाल तस्वीर

शिकायत मिलते ही मऊगंज कलेक्टर अधिकारियों के साथ करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर विद्यालय पहुंचे. वहां जो नजारा दिखाई दिया, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए. बच्चे जर्जर भवन में चटाइयों पर बैठकर पढ़ाई कर रहे थे. जिस भवन में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, उसी में मासूमों का भविष्य गढ़ा जा रहा था.

मिड-डे मील की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

कलेक्टर ने बच्चों से बातचीत की तो मध्यान्ह भोजन की हकीकत भी सामने आ गई. बच्चों ने बताया कि उन्हें ज्यादातर दिनों में केवल दाल-चावल ही परोसा जाता है. उन्होंने दाल में पानी अधिक होने और गुणवत्ता खराब होने की शिकायत भी की. निरीक्षण के दौरान भोजन गैस की बजाय लकड़ियों पर पकता मिला, जबकि विद्यालय को गैस सुविधा पहले से उपलब्ध कराई जा चुकी है. इस पर कलेक्टर ने समूह संचालक को कड़ी फटकार लगाई और भुगतान रोकने की चेतावनी दी.

थालियां धोते बच्चों का दृश्य बना सबसे बड़ा सवाल

लेकिन सबसे मार्मिक दृश्य वह था, जिसने हर संवेदनशील व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर दिया. जिन नन्हे हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए थी, वे हैंडपंप पर अपनी थालियां धोते नजर आए. यह दृश्य केवल एक विद्यालय की कहानी नहीं, बल्कि उन व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़ा करता है, जो बच्चों के अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदार हैं.

जर्जर भवन में कक्षाएं लगाने पर लगाई रोक

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने जर्जर भवन में बच्चों को बैठाकर पढ़ाई कराने पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए. साथ ही नए विद्यालय भवन का प्रस्ताव तैयार कर भेजने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया. जमीन पर केवल मैट बिछाकर बच्चों को बैठाने की व्यवस्था पर भी उन्होंने नाराजगी जताई.

कार्रवाई पर टिकीं अब सभी की निगाहें

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई केवल फटकार और चेतावनी तक सीमित रहेगी, या फिर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर वास्तव में सख्त कार्रवाई होगी? मुख्यमंत्री जन विश्वास शिविर ने भले ही स्कूल की सच्चाई उजागर कर दी हो, लेकिन अब जनता यह देखना चाहती है कि जिम्मेदारों के खिलाफ प्रशासन कितना भरोसेमंद और कठोर कदम उठाता है.

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