मऊगंज: आधी रात में पंचायत की DSC सक्रिय, अगले ही दिन खाते से 6 लाख रुपये गायब, जानें पूरा मामला
जिला पंचायत रीवा
Mauganj: जिले के जनपद पंचायत हनुमना के खटखरी ग्राम पंचायत एक बार फिर विवादों के केंद्र में है. इस बार मामला किसी विकास कार्य का नहीं, बल्कि पंचायत के डिजिटल वित्तीय अधिकारों से जुड़ा है. आरोप है कि प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद सचिव सुरेश त्रिपाठी का परिवर्तन होने के बावजूद रीवा जिला पंचायत ने देर रात 16 जुलाई को 10:45 बजे आदेश जारी कर पूर्व सचिव रामलोचन शर्मा की डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) पुनः सक्रिय कर दी. और अगले ही दिन पंचायत खाते से करीब 6 लाख रुपये के भुगतान की जानकारी सामने आने के बाद पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद भी क्यों बदले गए वित्तीय अधिकार?
जानकारी के अनुसार, शासन स्तर पर प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद नए सचिव की पदस्थापना की जा चुकी थी. ऐसे में सामान्य रूप से वित्तीय कार्य उसी सचिव की DSC से संचालित होने चाहिए थे. लेकिन आरोप है कि जिला पंचायत ने नए सचिव की DSC सक्रिय करने के बजाय पूर्व सचिव की DSC को पुनः चालू कर दिया. इससे यह सवाल उठ रहा है कि जब सचिव परिवर्तन प्रभावी हो चुका था, तब पूर्व सचिव को दोबारा वित्तीय अधिकार देने की आवश्यकता क्यों पड़ी.
रात 10:45 बजे आदेश जारी करने की क्या थी मजबूरी?
पूरे मामले का सबसे चर्चित पहलू यह है कि यह आदेश कार्यालयीन समय के बाद रात 10:45 बजे जारी किया गया. आमतौर पर ऐसे प्रशासनिक आदेश नियमित कार्यालय समय में जारी किए जाते हैं. ऐसे में ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ऐसी कौन-सी आपात स्थिति थी, जिसके कारण देर रात डिजिटल हस्ताक्षर संबंधी आदेश जारी करना आवश्यक हो गया. यदि कोई विशेष परिस्थिति थी, तो उसका उल्लेख आदेश या प्रशासनिक रिकॉर्ड में स्पष्ट क्यों नहीं है, यही चर्चा का विषय बना हुआ है.
24 घंटे के भीतर लाखों का भुगतान, संदेह और गहरा
ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व सचिव की DSC सक्रिय होने के बाद महज 24 घंटे के भीतर करीब 6 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया. भुगतान किन कार्यों के लिए हुआ, किन हितग्राहियों या एजेंसियों को राशि जारी की गई और क्या सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया-इन सवालों के उत्तर ग्रामीण सार्वजनिक रूप से चाहते हैं. उनका कहना है कि इतनी तेजी से वित्तीय लेन-देन होने से संदेह स्वाभाविक रूप से बढ़ा है.
2.27 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के आरोपों के बीच नया विवाद
मामले को और संवेदनशील इसलिए माना जा रहा है क्योंकि ग्रामीण पहले से ही पंचायत में करीब 2 करोड़ 27 लाख रुपये के कथित वित्तीय घोटाले और अनियमितताओं के आरोप लगा रहे हैं. उनका कहना है कि इन शिकायतों की जांच लंबित रहने के दौरान पूर्व सचिव की DSC दोबारा सक्रिय करना कई नए सवाल खड़े करता है. ग्रामीणों का दावा है कि पहले आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी, उसके बाद ही वित्तीय अधिकारों से जुड़ा कोई निर्णय लिया जाना चाहिए था.
ग्रामीणों की मांग-सार्वजनिक हो पूरी प्रक्रिया
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच की मांग की है. उनका कहना है कि यदि जिला पंचायत का निर्णय नियमों के अनुरूप था, तो प्रशासन को आधी रात में आदेश जारी करने का कारण, DSC पुनः सक्रिय करने का आधार, अगले दिन हुए भुगतान का पूरा विवरण तथा संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए. उनका मानना है कि इससे जनता के बीच उठ रहे संदेह दूर होंगे और प्रशासनिक पारदर्शिता पर विश्वास कायम रहेगा.