क्या MP में इथेनॉल की वजह से गरीबों की चीनी पर आफत? 12 लाख अंत्योदय परिवारों की शक्कर बंद
मऊगंज: राशन की दुकान के बाहर बैठे लोग
Mauganj News: मध्य प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिए गरीबों तक खाद्य सामग्री पहुंचाने के सरकारी दावों के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लाखों अंत्योदय परिवारों की रसोई की मिठास छीन ली है. प्रदेश के करीब 12 लाख अंत्योदय कार्डधारियों को उचित मूल्य की दुकानों से मिलने वाली 20 रुपये प्रति किलो की रियायती शक्कर अप्रैल 2026 से पूरी तरह बंद है.
हालात यह हैं कि खुले बाजार में शक्कर की कीमत 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है, जबकि सबसे गरीब वर्ग को मिलने वाला कोटा पिछले पांच महीनों से शून्य बना हुआ है. इससे सरकार की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था और गरीब कल्याण योजनाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.इस पूरे मामले की पड़ताल में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के aEPDS पोर्टल पर दर्ज आंकड़े बेहद चौंकाने वाले सामने आए हैं।
चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने
जनवरी माह में 12,51,418 किलो, फरवरी में 12,35,167 किलो और मार्च में 12,58,320 किलो शक्कर का आवंटन किया गया था. लेकिन अप्रैल से लेकर अगस्त तक शक्कर का आवंटन पूरी तरह शून्य दर्ज है. यानी प्रदेश के लाखों अंत्योदय हितग्राहियों को पिछले कई महीनों से रियायती शक्कर उपलब्ध ही नहीं कराई गई. जब इस विषय में मैदानी अधिकारियों से जानकारी ली गई तो उनका साफ कहना था कि ऊपर से आवंटन ही नहीं आ रहा है, इसलिए वितरण संभव नहीं हो पा रहा है.
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विपक्ष ने सरकार को घेरा
शक्कर की कमी और लगातार बढ़ती कीमतों के बीच प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है. इंडियन नेशनल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने सरकार पर तीखे आरोप लगाए हैं. विपक्ष का दावा है कि सरकार गन्ने का बड़ा हिस्सा इथेनॉल उत्पादन में खपा रही है, जिसके कारण चीनी उत्पादन प्रभावित हुआ है. विपक्ष का आरोप है कि जब गन्ने का उपयोग ईंधन उत्पादन के लिए बढ़ाया गया तो शक्कर का उत्पादन घटा और इसका सीधा असर बाजार में कीमतों पर पड़ा. विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार की नीतियों का सबसे बड़ा खामियाजा गरीब और अंत्योदय वर्ग को भुगतना पड़ रहा है, जिनके हिस्से की शक्कर अब राशन दुकानों से गायब हो चुकी है.
महंगाई की मार से टूटा गरीबों का बजट
रियायती शक्कर बंद होने का असर सीधे गरीब परिवारों की जेब पर पड़ रहा है. मऊगंज सहित कई जिलों में बाजार भाव तेजी से बढ़े हैं. स्थानीय व्यापारियों के अनुसार 50 किलो की शक्कर की बोरी, जो कुछ समय पहले लगभग 2 हजार रुपये में मिल जाती थी, अब 3,225 रुपये तक पहुंच गई है. खुदरा बाजार में शक्कर 65 से 70 रुपये किलो बिक रही है. इसका असर आम जनजीवन पर भी दिखाई देने लगा है. छोटी दुकानों और चाय ठेलों पर 10 रुपये में मिलने वाली चाय अब 15 रुपये तक पहुंच गई है. त्योहारों, घरेलू उपयोग और दैनिक जरूरतों के लिए शक्कर खरीदना गरीब परिवारों के लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा है.
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12 लाख गरीब परिवार पूछ रहे सवाल
एक ओर सरकार गरीब कल्याण और खाद्य सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के लगभग 12 लाख अंत्योदय कार्डधारी अपने हिस्से की शक्कर के लिए इंतजार कर रहे हैं. पांच महीने से आवंटन बंद होने के बावजूद अब तक कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है कि आखिर शक्कर वितरण कब शुरू होगा. इथेनॉल नीति, घटता आवंटन, बढ़ती कीमतें और पीडीएस से गायब शक्कर इन सभी सवालों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर गरीबों के हिस्से की मिठास कब लौटेगी और सरकार इस संकट का समाधान कैसे करेगी?