रेटिंग चमकाने के लिए कॉन्स्टेबल ने डायल 112 पर करा दी 233 फर्जी शिकायत, मऊगंज एसपी ने किया लाइन अटैच

Mauganj News: मऊगंज में तैनात आरक्षक विवेक यादव ने रेटिंग चमकाने के लिए डायल 112 पर 21 मोबाइलों से 233 फर्जी शिकायतें करवा दीं. पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार जैन ने कॉन्स्टेबल को लाइन अटैच कर दिया है.
mauganj to increase rating constable orchestrated 233 fake complaints to Dial 112 using 21 mobile phones

अंकित चौरसिया के नाम से कराई गई 15 से अधिक शिकायतें

Mauganj News: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार जिस ‘सीएम हेल्पलाइन 181’ को पीड़ित जनता की आखिरी उम्मीद और सबसे बड़ा हथियार मानती है. मऊगंज पुलिस के एक शातिर सिंडिकेट ने उसे अपनी रेटिंग चमकाने का ‘टूल’ बना दिया. पूरी ताकत से इस महाफर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार की कड़ियों को उजागर किया, तो महकमा ऐसा हड़बड़ाया कि आनन-फानन में पुलिस अधीक्षक ने आरक्षक विवेक यादव को लाइन अटैच कर दिया.

यहां सबसे बड़ा और तीखा सवाल यह है कि क्या सिर्फ एक आरक्षक को बलि का बकरा बनाकर इस पूरे मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है? जब प्रमाण पूरी तरह सामने आ चुके हैं, तो शिकायतों के निपटारे की मुख्य जिम्मेदार यानी L1 अधिकारी थाना प्रभारी रीना सिंह पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या मैडम की नाक के नीचे चल रहे इस संगठित खेल में उनकी मौन सहमति नहीं थी?

क्या है पूरा मामला?

मऊगंज पुलिस का यह वो शातिर सिंडिकेट है, जो जनता को इंसाफ देने के बजाय खुद ही फर्जी शिकायतकर्ता बन बैठा था. महकमे के आला अधिकारियों की नजरों में कागजी छवि चमकाने के लिए पिछले कुछ महीनों में महज 21 मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके 233 फर्जी शिकायतें दर्ज करा दी गईं. इस सिंडिकेट में आरक्षक विवेक यादव, डायल 112 के कर्मचारी प्रवेश चौबे, कृष्णा कुशवाहा शामिल थे. हद तो तब हो गई जब थाना प्रभारी की सरकारी गाड़ी चलाने वाला, एक ही दिन में नौ गवाही देने वाला निजी ड्राइवर दयाशंकर तिवारी भी इसमें शामिल पाया गया.

इस सिंडिकेट के ओवर-कॉन्फिडेंस और जल्दबाजी का यह प्रमाण देखिए, जो चिल्ला-चिल्लाकर फर्जीवाड़े की गवाही दे रहा है.

सुबह 11:30 बजे: शिकायत क्रमांक 38687509 दर्ज
सुबह 11:31 बजे: ठीक एक मिनट बाद, शिकायत क्रमांक 38687518 दर्ज.
सुबह 11:32 बजे: अगले ही मिनट, तीसरी शिकायत क्रमांक 38687522 दर्ज.
सुबह 11:33 बजे: एक साथ दो और शिकायतें (38687533 और 38687544) हुई दर्ज.

4 मिनट में 5-5 गंभीर शिकायतें

महज 4 मिनट के भीतर 5-5 गंभीर शिकायतें! शाम को भी ठीक ऐसा ही खेल 6 मिनट के भीतर 5 और शिकायतें ठोक कर खेला गया. क्या कोई आम इंसान इतनी तेजी से शिकायतें दर्ज करा सकता है? साफ है कि बंद कमरे में बैठकर खुद ही शिकायत लिखी जाती थी और खुद ही उसका जादुई निपटारा दिखाकर फाइलें बंद कर दी जाती थीं.

एक झूठी शिकायत से सच सामने आया

इस सिंडिकेट की जालसाजी का सबसे मजेदार और शर्मनाक नमूना तब सामने आया, जब इन्होंने ‘अंकित चौरसिया’ नाम के एक युवक के नाम पर फर्जी शिकायत दर्ज की. पुलिस ने कागजों में कहानी गढ़ी कि अंकित की 20 साल की बेटी स्कूल के लिए निकली और गायब हो गई, लेकिन जब पड़ताल में असली अंकित चौरसिया सामने आया, तो उसने खाकी के झूठ के परखच्चे उड़ा दिए. अंकित ने कैमरे पर साफ कहा, “साहब, मेरी तो अभी तक शादी ही नहीं हुई है! जब मेरी शादी ही नहीं हुई, तो मेरी 20 साल की बेटी कहां से गायब हो जाएगी? “सोचिए, अपनी झूठी ग्रेडिंग सुधारने के लिए इस सिंडिकेट ने किडनैपिंग, लूट, डकैती और नाबालिग बच्चियों से छेड़छाड़ जैसे संगीन मामलों को फर्जीवाड़े का जरिया बनाया.

कई लोगों पर उठ रहे सवाल

अब सुलगता हुआ सवाल मऊगंज थाने की कमान संभाल रही थाना प्रभारी रीना सिंह पर उठता है. सीएम हेल्पलाइन के नियमों के मुताबिक, शिकायतों के समाधान के लिए सबसे पहली जिम्मेदार यानी L1 अधिकारी खुद थाना प्रभारी होती हैं. ऐसे में क्या यह मुमकिन है कि मैडम को अपनी नाक के नीचे चल रहे इस सिंडिकेट की भनक तक न हो? या फिर अपनी कुर्सी बचाने के लिए इस पूरे खेल को उनकी मौन सहमति मिली हुई थी?

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यही नहीं, मऊगंज पुलिस अधीक्षक ने सख्त हिदायत दी थी कि किसी भी हाल में प्राइवेट वाहन चालक से सरकारी गाड़ी न चलवाई जाए. इसके बावजूद थाना प्रभारी ने उसी दयाशंकर तिवारी को थाने में क्यों पाल रखा था, जिस पर एक ही दिन में 9-9 मामलों में ‘पॉकेट गवाह’ बनने के गंभीर आरोप हैं? आखिर इस निराकरण अधिकारी को बचाने के लिए आरक्षक की बलि क्यों चढ़ाई जा रही है?

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