सागर शराब कांड के बाद मऊगंज में माफिया पर शिकंजा! 17 ठिकानों पर दबिश, 5380 किलो लाहन और 165 लीटर कच्ची दारू जब्त
पुलिस ने जब्त की अवैध शराब
MP News: सागर शराब कांड के बाद मध्यप्रदेश में अवैध शराब के खिलाफ प्रशासन की सख्ती बढ़ गई है. इसी कड़ी में मऊगंज में आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने अवैध शराब के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए डिघिया, चाकघाट और चन्दई में ताबड़तोड़ दबिश दी. अलग-अलग रिहायशी मकानों में हुई कार्रवाई के दौरान 17 प्रकरण दर्ज किए गए.
डिघिया में एक के बाद एक दबिश
आबकारी टीम ने ग्राम डिघिया में कई मकानों की तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में महुआ लाहन और हाथ भट्टी शराब बरामद हुई. विभाग के अनुसार अलग-अलग ठिकानों से 3600 किलो से अधिक महुआ लाहन और बड़ी मात्रा में हाथ भट्टी शराब जब्त की गई. कार्रवाई के दौरान लाहन को नष्ट किया गया, जबकि बरामद शराब को जब्ती में लिया गया.
चाकघाट की मल्लाहटी भी निशाने पर
अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई का दायरा चाकघाट के वार्ड नंबर-10 मल्लाहटी तक पहुंचा. यहां भी कई रिहायशी मकानों पर छापेमारी की गई. टीम ने भारी मात्रा में लाहन और हाथ भट्टी शराब बरामद की. कार्रवाई से इलाके में अवैध शराब बनाने वालों में हड़कंप मच गया.
चन्दई में यूपी की शराब बरामद
ग्राम चन्दई में शिवनारायण जायसवाल के रिहायशी मकान से उत्तर प्रदेश निर्मित 45 पाव बेंडीज शराब जब्त की गई. यानी कार्रवाई में सिर्फ कच्ची शराब ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्य से लाई गई शराब भी सामने आई है.
5.66 लाख की सामग्री जब्त
पूरी कार्रवाई में आबकारी विभाग ने 5380 किलो महुआ लाहन, 165 लीटर हाथ भट्टी मदिरा और यूपी निर्मित 45 पाव शराब बरामद की. जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत 5 लाख 66 हजार 350 रुपये बताई गई है. सभी मामलों में मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(1)(क)(च) के तहत प्रकरण दर्ज किए गए.
अब बड़े सवाल पर नजर
सागर शराब कांड के बाद हुई इस कार्रवाई ने अवैध शराब के खिलाफ प्रशासन की सक्रियता जरूर दिखाई है, लेकिन सवाल अब भी बड़ा है, क्या कार्रवाई सिर्फ कच्ची शराब बनाने वाले ठिकानों तक सीमित रहेगी या इसके पीछे मौजूद पूरे सप्लाई नेटवर्क तक भी पहुंचेगी?
आबकारी विभाग ने अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रखने का दावा किया है।. अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में कार्रवाई कितनी बड़ी होती है और क्या अवैध शराब के पूरे कारोबार की जड़ तक प्रशासन पहुंच पाता है.
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