रीवा में जल जीवन मिशन में 136 करोड़ का घोटाला, 12 गांवों में सत्यापन, न टंकी मिली न पाइपलाइन
जल जीवन मिशन में 136 करोड़ का घोटाला उजागर
136 Crore Corruption Exposed: रीवा में जल जीवन मिशन योजना पर करीब 136 करोड़ रुपए के घोटाले का खुलासा हुआ है. जिसमें से करीब 130.47 करोड़ रुपए का भुगतान तो बिना काम के ही कर दिया गया. EOW की जांच में PHE के 23 कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है. लेकिन जांच के एक साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है. जांच में पाइपलाइन और अन्य कामों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि परियोजनाओं में कथित अनियमितता कैसे हुई और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है.
जल जीवन मिशन की जांच चल रही रही थी कि इसी बीच मऊगंज के खटखरी में पानी की टंकी टेस्टिंग के दौरान गिर गई. इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में ईओडब्ल्यू ने ठेकेदार समेत 3 इंजीनियरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया. अब इसकी भी जांच शुरू है.
12 गांवों में सत्यापन, न टंकी मिली न पाइपलाइन
इसी बीच विभागीय जांच में सामने आया कि जल जीवन मिशन की एकल नल-जल योजना में बिना काम के करीब 130.47 करोड़ रुपए का भुगतान हो गया. हैरानी की बात है कि तत्कालीन कलेक्टर ने ट्रेनी आईएएस सोनाली देव के नेतृव्य में भुगतान और काम का दस्तावेजी परीक्षण कराने के साथ ही 12 गांवों का भौतिक सत्यापन भी कराया था. इस दौरान कई जगहों पर टंकी और पाइपलाइन नहीं होने के बावजूद घरों में नल लगाकर काम पूरा होने की फोटो खींची गई थी.
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जांच में क्या मिला?
जल जीवन मिशन की जांच में पाया गया कि 130.47 करोड़ रुपए का भुगतान बिना किसी काम के कर दिया गया. इसके साथ ही 12 गांवों के सत्यापन में भी कई कमियां पाई गईं. थर्ड पार्टी को भी पेमेंट्स किए गए लेकिन उसके दस्तावेज नहीं जमा किए गए हैं. स्टेशनरी, कार्यालय खर्च और वाहन किराए के नाम पर भी 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान हुआ है, जिसके दस्तावेज नहीं मिले हैं. हैरानी की बात यह है कि इसकी जांच 1 साल से ज्यादा से हो रही है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई.