Rewa: आजादी के जश्न में मातम! खदान में भरे पानी में डूबने से दो बच्चों की मौत

Rewa News: स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से दोनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला गया. गंभीर हालत में दोनों को तत्काल उपचार के लिए भेजा गया. बाद में दोनों को रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय रेफर किया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया.
rewa two children drowned in a water-filled mine

रीवा: खदान में भरे पानी में डूबने से दो बच्चों की हुई मौत

Rewa News: स्वतंत्रता दिवस का दिन स्कूलों में तिरंगा लहरा रहा था. बच्चे देशभक्ति के गीत गा रहे थे और हर तरफ उत्साह का माहौल था. लेकिन इसी बीच गढ़ थाना क्षेत्र में एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया. स्कूल के खेल मैदान के समीप पानी से लबालब भरी गहरी खदान में डूबने से दो मासूम छात्रों की जान चली गई. जिन हाथों में तिरंगा होना था, वे आज अपनों के अंतिम संस्कार की तैयारी में मजबूर हैं.

हादसा या लापरवाही

यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, सुरक्षा व्यवस्था और अवैध मिट्टी उत्खनन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर विद्यालय और खेल मैदान के समीप इतनी गहरी खदान कैसे बनी? उसमें पानी भरने के बाद भी उसे सुरक्षित क्यों नहीं कराया गया? क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने कभी इस खतरनाक स्थान की सुध ली?

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार सुभाष सोनी पिता रजनीश सोनी, उम्र करीब 13 वर्ष, निवासी खर्रा, थाना नईगढ़ी, जिला मऊगंज तथा शिव पाठक पिता पूर्णेंद्र पाठक, निवासी तेडताल, थाना नईगढ़ी, जिला मऊगंज स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में शामिल होने गढ़ आए थे.सुभाष गढ़ के बाल भारती स्कूल में पढ़ता था, जबकि शिव पाठक पतंजलि पब्लिक स्कूल गढ़ का छात्र था.

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कार्यक्रम समाप्त होने के बाद दोनों बच्चे शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गढ़ के खेल मैदान के समीप पहुंचे. इसी दौरान मैदान के बगल में बनी गहरी खदान में भरे पानी में दोनों डूब गए. कुछ ही देर में चीख-पुकार मच गई. ग्रामीणों को घटना की जानकारी मिली तो बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए. गढ़ पुलिस को सूचना दी गई और बच्चों को बचाने के लिए तलाश अभियान शुरू किया गया.

डॉक्टर्स ने दोनों बच्चों को मृत घोषित किया

स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से दोनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला गया. गंभीर हालत में दोनों को तत्काल उपचार के लिए भेजा गया. बाद में दोनों को रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय रेफर किया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया.

दो मासूमों की मौत की खबर जैसे ही उनके गांव और परिजनों तक पहुंची, वहां कोहराम मच गया. जिस दिन परिवार अपने बच्चों के साथ स्वतंत्रता दिवस की खुशियां मनाने की उम्मीद कर रहा था, उसी दिन घरों में मातम छा गया.

अव्यवस्था पर उठे सवाल

इस हादसे के बाद सबसे गंभीर सवाल खदान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे हैं. स्थानीय स्तर पर बताया जा रहा है कि यह गहरी खदान मिट्टी उत्खनन के कारण बनी और बारिश के बाद इसमें पानी भर गया. अगर यह स्थान इतना गहरा और खतरनाक था तो इसके चारों ओर बाड़, बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड क्यों नहीं लगाए गए?

अगर यह विद्यालय के खेल मैदान के इतने करीब था तो बच्चों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार विभागों ने इसे पहले क्यों नहीं देखा? और अगर यहां मिट्टी का उत्खनन हुआ था तो उत्खनन की अनुमति किसने दी, कितनी जमीन पर उत्खनन हुआ और सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच कौन करेगा?

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नियमों के उल्लंघन पर जिम्मेदार कौन?

गढ़ की इस घटना ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. हादसे के बाद अब जरूरत केवल संवेदना व्यक्त करने की नहीं, बल्कि जवाब मांगने की है. जनप्रतिनिधियों को प्रशासन से पूछना होगा कि विद्यालय और सार्वजनिक खेल मैदान के समीप ऐसी खतरनाक खदान किसकी अनुमति से बनी? जिम्मेदार विभाग ने क्या निरीक्षण किया? सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

एक हादसा नहीं, भविष्य की चेतावनी

यह घटना सिर्फ दो परिवारों का दुख नहीं है. यह पूरे क्षेत्र के लिए चेतावनी है. गढ़ और आसपास यदि ऐसी अन्य गहरी खदानें, गड्ढे या जलभराव वाले असुरक्षित स्थान मौजूद हैं तो उनका तत्काल चिन्हांकन किया जाना चाहिए. विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, खेल मैदानों और आबादी के आसपास मौजूद खतरनाक गड्ढों और खदानों को सुरक्षित कराने के लिए प्रशासन को विशेष अभियान चलाना होगा.

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