MP News: मैहर में अवैध उत्खनन और वन कटाई पर बढ़ा ग्रामीणों आक्रोश, लोगों ने उठाए सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के सवाल
ग्रामीणों आक्रोश
MP News: मैहर जिले के रामनगर क्षेत्र के कुबरी और रझौहा गांवों में सोन नदी के किनारे कथित अवैध रेत उत्खनन और वन भूमि पर पेड़ों की कटाई स्थानीय लोगों के लिए नासूर बनती जा रही है. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सोन घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली शासकीय वन भूमि पर बड़े पैमाने पर उत्खनन किया जा रहा है. जिस क्षेत्र में कभी महुआ, तेंदू, सागौन और सरई जैसे वृक्षों से घना जंगल हुआ करता था, वहां आज गहरे गड्ढे और उजड़ी हुई वन भूमि दिखाई दे रही है.
लोगों का कहना है कि यह केवल पर्यावरण पर हमला नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है. मौके पर पहुंचे दिलीप मिश्रा ने स्थानीय लोगों की पीड़ा को समझने का प्रयास किया. उनका कहना है कि क्षेत्रवासी कई वर्षों से इस समस्या को झेल रहे हैं.
बिजली टावरों की सुरक्षा पर मंडराया खतरा
स्थानीय लोगों के अनुसार लगातार हो रहे उत्खनन के कारण क्षेत्र में लगे हाई वोल्टेज बिजली टावरों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है. जमीन के कटाव से टावरों की नींव कमजोर होती जा रही है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिससे जन-धन की भारी हानि होने की आशंका है.
शिकायतों के बावजूद नहीं दिख रही ठोस कार्रवाई
हैरानी की बात यह है कि लोगों की शिकायतों और जांच के निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है. प्रतिदिन बड़ी संख्या में डंपरों के माध्यम से रेत का परिवहन किया जा रहा है. इससे स्थानीय लोगों में प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार शिकायतों के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं.
अवैध खनन से बढ़ रहा भय और असुरक्षा का माहौल
यह मामला केवल अवैध उत्खनन और खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल भी लगातार बढ़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध खनन गतिविधियों के कारण क्षेत्र में तनाव का वातावरण बना हुआ है और लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है.
पुरानी घटनाएं बनीं चिंता का कारण
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अतीत में अवैध खनन से जुड़े विवादों के कारण कई गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं. यही वह क्षेत्र है जहां पूर्व में पदस्थ पटवारी प्रसन्न सिंह की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी गई थी. इसके अलावा तत्कालीन नायब तहसीलदार आर.एन. रावत पर ट्रैक्टर चढ़ाकर जानलेवा हमला किया गया था. वहीं एक ट्रैक्टर चालक की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौत ने भी कई सवाल खड़े किए थे.
इन घटनाओं को लोग इस बात का प्रमाण मानते हैं कि अवैध खनन किस प्रकार कानून-व्यवस्था और जनसुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है. लोगों का कहना है कि जब अधिकारी तक सुरक्षित नहीं हैं, तब आम नागरिकों की चिंता स्वाभाविक है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम जनता द्वारा हर स्तर पर शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई सार्थक और प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है.
स्थानीय लोग लगातार जता रहे चिंता
क्षेत्र के निवासी लगातार इस मुद्दे को लेकर अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं. उनका कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों के लगातार दोहन से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है और भविष्य में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है.
उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों की मांग है कि कुबरी और रझौहा क्षेत्र में हो रहे अवैध उत्खनन एवं वन कटाई की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए. दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए. साथ ही क्षेत्र में लगे बिजली टावरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा प्राकृतिक संसाधनों और वन संपदा को बचाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं.
इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस भी अब शासन-प्रशासन पर सवाल उठा रही है. दिलीप मिश्रा का कहना है कि यदि शासन और प्रशासन ने इस मामले में जल्द कार्रवाई नहीं की, तो लोगों की सुरक्षा और क्षेत्र के हितों को ध्यान में रखते हुए आंदोलन भी किया जाएगा.
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