‘तीन जिंदगियां गईं, फिर भी सोता रहा सिस्टम…’, सागर में SDRF के पास ना कैमरा-ना तैयारी, 18 घंटे बाद निकल पाए शव
एसडीआरएफ टीम
Sagar News: मध्य प्रदेश का सागर संभाग इन दिनों चर्चा में बना हुआ है.इसके पीछे की वजह राजनीति और यहां का खराब सिस्टम है. ऐसा इसलिए क्योंकि सागर में एसडीआरएफ टीम के पास मूलभूत सुविधाएं ही नहीं हैं, जिनकी मदद से किसी भी घटना के बाद बचाव अभियान चलाया जा सके. यही वजह है कि 3 लोगों के शव 18 घंटे बाद निकाले गए हैं.
सागर जिले की गुढ़ा क्षेत्र स्थित क्रेशर खदान में डूबे तीन युवकों की मौत ने प्रशासनिक लापरवाही की परतें खोल दी हैं. हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिला मुख्यालय पर एसडीआरएफ जैसी आपदा राहत टीम मौजूद है, तो मौके पर पहुंची टीम जरूरी उपकरणों के बिना कैसे पहुंच गई? अगर समय रहते संसाधन होते, तो शायद तीन परिवार उजड़ने से बच सकते थे.
बिना उपकरणों के ही चलाते रहे सर्च ऑपरेशन
तीन युवक खदान के गहरे पानी में डूब गए थे. घटना की सूचना मिलते ही राहत टीम को बुलाया गया, लेकिन टीम बिना अंडरवॉटर कैमरे और पर्याप्त तकनीकी संसाधनों के पहुंची. नतीजा यह हुआ कि रातभर तलाश चलती रही, लेकिन सफलता नहीं मिली. बाद में दूसरे जिले से विशेषज्ञ टीम और उपकरण बुलाने पड़े. करीब 18 घंटे बाद शव बाहर निकाले जा सके.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस टीम पर लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी है, वही टीम अधूरी तैयारी के साथ रवाना हुई. सवाल यह भी है कि क्या जिले में केवल नाम की राहत व्यवस्था चल रही है? अगर गोताखोरों के पास जरूरी कैमरा, लोकेशन उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ होता, तो रेस्क्यू ऑपरेशन इतना लंबा क्यों खिंचता?
स्थानीय लोगों में नाराजगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि खदान क्षेत्र पहले से ही खतरनाक माना जाता है. इसके बावजूद वहां सुरक्षा इंतजाम न के बराबर हैं. न चेतावनी बोर्ड, न घेराबंदी और न निगरानी. हादसे के बाद प्रशासन सक्रिय दिखा, लेकिन जब तक मशीनरी जागी, तब तक तीन घरों के चिराग बुझ चुके थे.
ऐसा पहली बार नहीं है जब अधूरी तैयारी के साथ काम शुरू किया गया हो, पहले भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं. जब प्रशासन की लापरवाही के कारण लोगों की जान गई है.
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