मध्‍य प्रदेश में न‍िगम मंडल की न‍ियुक्‍त‍ियों पर बवाल! रेखा यादव के बाद अब हो रहा महेश केवट का विरोध

MP Nigam Mandal Niyukti: मध्यप्रदेश के निगम मंडलों में नियुक्तियां शुरू हो चुकी हैं. इनमें अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग में पूर्व विधायकों की नियुक्ति कर दी गई है. हालांकि इन नियुक्तियों का अब विरोध भी शुरू हो चुका है.
महेश केवट और रेखा यादव

महेश केवट और रेखा यादव

MP Nigam Mandal Niyukti: मध्य प्रदेश में निगम मंडलों की नियुक्ति जारी हैं. इनमें कई ऐसे नेताओं को मौका दिया जा रहा है, जो लंबे समय से अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे. हालांकि नियुक्‍त‍ियों के साथ ही कई जगहों पर इनको लेकर विरोध देखने को मिल रहा है. पूर्व विधायक रेखा यादव के बाद अब महेश केवट का भी विरोध शुरू हो गया है.

महेश केवट को सरकार ने राज्य मंत्री का दर्जा दिया है. उन्हें मछुआ कल्‍याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है. इसके बाद से ही हलचल तेज हो चली है. साथ ही साथ नियुक्ति पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं. इसके पीछे की वजह है उनका पार्टी से पुराना निष्‍कासन माना जा रहा है.

बीजेपी ने महेश केवट को किया था निष्कासित

महेश केवट को साल 2022 में बीजेपी ने पार्टी से निष्कासित कर दिया था.उस समय प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा थे. महेश पर आरोप था कि उन्‍होंने नगर परिषद न‍िवाड़ी में हुए चुनाव में पार्टी के विरोध में काम किया था. महेश के साथ-साथ पार्टी ने 11 अन्‍य लोगों को निष्कासित किया था. सभी को 6 सालों के लिए पार्टी से बाहर किया गया था.

क्या आरोप लग रहे हैं?

कई लोग महेश केवट की नियुक्‍ती पर तर्क दे रहे हैं कि पार्टी ने जब साल 2022 में उसे पार्टी से बाहर किया था तो साफ कहा था कि उन्हें 6 साल के लिए बाहर किया जा रहा है. अभी निष्‍कासन चल ही रहा है. उसका समय पूरा होने में अभी भी 2 साल का समय बचा हुआ है. इसके बाद भी पार्टी ने उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी कैसे दे दी है. जबकि पार्टी कई पुराने कार्यकर्ता इस पद के लिए उपयुक्त थे. इसके बाद भी यह फैसला लिया गया है.

व‍िरोध के बाद पार्टी बदलेगी अपना फैसला

कुछ ऐसा ही मामला महिला आयोग की अध्यक्ष बनाई गई रेखा यादव को लेकर भी सामने आया है. कई बीजेपी के पुराने कार्यकर्ताओं ने इस नियुक्ति के विरोध में नारेबाजी की है. इसके साथ ही पार्टी पदाधिकारियों को ज्ञापन देकर इस फैसले पर विचार करने को कहा है. ऐसे में देखना होगा कि आने वाले दिनों में पार्टी अपने फैसले पर अडिग रहती है या फिर विरोध के चलते अपना फैसला बदलती है.

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