एमपी में तेजी से बढ़ रही विलुप्त जानवरों की संख्या, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बारहसिंगा की संख्या 50 से 260 हुई

MP News: सतपुड़ा बाघ अभ्यारण्य उन कई क्षेत्रों में से एक है, जो पहले कठोर जमीन वाले बारासिंघा हिरण के वितरण क्षेत्र में आते थे. 2015 तक कान्हा बाघ अभ्यारण्य ही इस हिरण की एकमात्र स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाली आबादी का घर था.
The number of the endangered swamp deer has increased from 50 to 260 in the Satpura Tiger Reserve.

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बढ़ी बारहसिंगा की संख्या

MP News: दलदली या सुंदर हिरण के नाम से जाना जाने वाला बारासिंघा सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) को भी गुलजार करने लगा है. बारासिंघा मध्य प्रदेश का राज्य पशु है. कान्हा के बाद सतपुड़ा टाइगर रिजर्व दुनिया का एकमात्र ऐसा स्थान है, जहां बारासिंघा की आबादी बढ़ रही है. संरक्षण और सुरक्षित आवास मिलने से एसटीआर में बारासिंघा की संख्या अब 260 हो गई है.

सतपुड़ा रिजर्व में 1920 में विलुप्त हुई थी प्रजाति

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बारासिंघा की यह प्रजाति 1920 के दशक में विलुप्त हो चुकी थी. वहीं एमपी के जंगल से 1970 के दशक बारासिंघा विलुप्त होने की कगार पर थे. तब कान्हा टाइगर रिजर्व में इन्हें संरक्षित करने के प्रयास शुरू हुई. वर्तमान में कान्हा टाइगर रिजर्व में 1 हजार से अधिक बारासिंघा हैं.

कान्हा टाइगर रिजर्व को बारासिंघा के नाम से ही जाना जाता है. अब इस बारासिंघा की प्रजाति सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में भी बढ़ने लगी है. इसको देखते हुए सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में इसे संरक्षित करने के लिए एक कॉरिडोर बनाया जा रहा है. सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बारासिंघा को साल 2015 में कान्हा टाइगर रिजर्व से लाकर बसाया गया था. उस समय एसटीआर में करीब 60 बारासिंघा छोड़े गए थे. अब इनकी संख्या एसटीआर में 260 से अधिक हो गई है.

दुधवा और काजीरंगा में पाई जाती है ये प्रजाति

हार्ड ग्राउंड बारासिंघा, जिसे आमतौर पर हार्ड ग्राउंड या मध्य भारतीय बारासिंघा के नाम से जाना जाता है, एक लुप्तप्राय प्रजाति है. यह भारतीय दलदली हिरण की एक उप-प्रजाति है और इसकी एक उत्तर भारतीय उप-प्रजाति मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के दुधवा राष्ट्रीय उद्यान में पाई जाती है, जबकि एक अन्य उत्तर भारतीय उप-प्रजाति असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पाई जाती है.

संरक्षण के लिए बनाया जा रहा कॉरिडोर

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की रिसर्च के मुताबिक यहां मौजूद बारासिंघा छोटे-छोटे समूह में रहने लगे हैं. वे हिरण के साथ भी रहते हैं. बारासिंघा के लिए बड़े घास के मैदान की जरूरत होती है. खास के मैदान के साथ ही उन्हें पीने के पानी की भी जरूरत रहती है. एसटीआर में मौजूद बारासिंघा के लिए एक सुरक्षित कॉरिडोर बनाया जा रहा है. यह कॉरिडोर एसटीआर के कोर और बफर क्षेत्र के भीतर बनाया जाएगा. कॉरिडोर ऐसा रहेगा कि बारासिंघा आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक बिना डरे जा सके. कैंपा और एसटीआर मिलकर यह काम कर रहे हैं। कॉरिडोर में घास के मैदान और पीने के पानी की व्यवस्था की जाएगी.

एसटीआर में इसलिए बसाए गए थे बारासिंघा

सतपुड़ा बाघ अभ्यारण्य उन कई क्षेत्रों में से एक है, जो पहले कठोर जमीन वाले बारासिंघा हिरण के वितरण क्षेत्र में आते थे. 2015 तक कान्हा बाघ अभ्यारण्य ही इस हिरण की एकमात्र स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाली आबादी का घर था. कई दशकों तक, कान्हा में समर्पित तकनीकी प्रबंधन ने इसकी आबादी में धीरे-धीरे वृद्धि की और भविष्य में इसके घटने की संभावना को काफी हद तक कम कर दिया.

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हालांकि, किसी लुप्तप्राय जानवर की पूरी आबादी को केवल एक ही स्थान पर सीमित करना तकनीकी रूप से गलत और जोखिम भरा माना गया, इसलिए उचित प्रक्रिया के बाद सतपुड़ा बाघ अभ्यारण्य को हिरण के लिए भौगोलिक रूप से अलग एक दूसरा घर स्थापित करने के लिए चुना गया. एसटीआर में घास के मैदान इस हिरण प्रजाति के लिए बड़ी संख्या में स्वादिष्ट घास की प्रजातियों और अच्छे जल स्रोतों भी हैं.

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