पण्डित देवनारायण भारतीय की जयंती पर राजधानी में विशेष आयोजन, इतिहास में उनके योगदान पर हुई विस्तृत चर्चा

पण्डित देवनारायण भारतीय की जयंती पर राजधानी भोपाल में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान इतिहास में उनके योगदान पर विस्तृत चर्चा की गई.
Pandit Devnarayan Bhartiya

पण्डित देवनारायण भारतीय की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम

पण्डित देवनारायण भारतीय तारे की भांति थे. उन्होंने खुद अज्ञात रहकर अपना पूरा जीवन भारत देश को रोशन करने में समर्पित कर दिया. उक्त बातें समीर पाटिल ने बुधवार को राजधानी स्थित स्वराज संस्थान संचालनालय में उत्तर भारत के प्रथम क्रान्तिकारी पण्डित देवनारायण भारतीय की जयंती पर आयोजित विशेष व्याख्यान पर कही. इस कार्यक्रम में पण्डित भारतीय की जीवन और क्रान्तिकारी इतिहास में उनके योगदान पर विस्तृत चर्चा हुई. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संचालनालय के उपसंचालक प्रो. संतोष कुमार वर्मा उपस्थित थे. विशिष्ट अतिथि और गरिमामय उपस्थिति में पण्डित भारतीय के वंशज द्वारा आदित्य मिश्र और मलय शर्मा उपस्थित थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता पंडित देवनारायण भारतीय आयोजन समिति के अध्यक्ष समीर पाटिल ने की. इसमें शहर के कई विद्वान जुड़े.

पण्डित देवनारायण भारतीय के वंशज आदित्य मिश्र ने बताया कि उन्हें पण्डित भारतीय का संस्कार उन्हें अपने घर से मिला. अपने वक्तव्य में उन्होंने बताया कि कैसे भारतीय जी के पास गांव भर से लोग सलाह मशवरा के लिए आते थे. उन्होंने बताया कि शचींद्रनाथ सान्याल ने उन्हें आगरा आने का निवेदन किया था मगर अपने गांव में ही जूझ रही समस्याओं को देखते हुए उन्होंने वहीं रहने का फैसला किया और सामाजिक उत्थान के लिए काम किया. पण्डित भारतीय के जीवन का एक हिस्सा कांग्रेस और सोशलिस्ट पार्टी के साथ भी बीता. उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी दादी और पं देवनारायण जी की पुत्री कुमुद मिश्रा से जाना था कि पं भारतीय ने भोपाल के विलीनीकरण आन्दोलन में नेतृत्वकर्ता की भूमिका अदा की थी. पण्डित भारतीय के वंशज मलय शर्मा ने इस आयोजन पर खुशी जताई और उनके कई किस्से सुनाए. उन्होंने बताया कि कैसे राजेंद्र प्रसाद जैसे नेताओं का भी भारतीय जी से मिलना जुलना होता रहता था.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर संतोष कुमार वर्मा ने पंडित देवनारायण भारतीय के योगदान को अतुलनीय बताया. प्रो. वर्मा ने बताया कि पंडित भारतीय सहित प्रदेश और देश में ऐसे कई महान क्रांतिकारी है जिन पर अभी शोध की अनेक संभावनाएं हैं.

संगोष्ठी में कई लोगों ने अपने विचार प्रस्तुत किए. मौजूद सभा में लोगों ने ऐसी विलक्षण विभूति को न जानने पर गहरा आश्चर्य व्यक्त किया. वरिष्ठ पत्रकार महेश परिमल ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे इतनी प्रसिद्धि के बाद भी वह अपने संघर्ष और कर्तव्य पथ पर अडिग रहे और अपना जीवन बिना किसी प्रलोभन की इच्छा के साथ जिया. मौजूद एक छात्र ने बताया कि भारतीय जी का नाम ऐसा है कि उनके नाम से भारत का स्मरण स्वतः ही हो जाता है. इस संदर्भ में रंगकर्मी सरोज शर्मा ने उनके जीवन को लोगों तक पहुंचाने के लिए नाटक और वृत्तचित्र बनाने पर जोर दिया.

इसी तरह कंटेंट क्रिएटर अविरल पंवार, प्रभात पोद्दार और यश दीक्षित जैसे लोगों ने भी अपने विचार रखे और उनके जीवन पर गहरा शोध करने की बात कही. इसके अतिरिक्त साहित्यकार करुणा राजुरकर राज, और शोधार्थी रक्षा पुरोहित ने उनको और बेहतर जानने पर बल दिया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहर से गणमान्य जन, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे. कार्यक्रम में समिति के महासचिव नमन अटोलिया ने समिति की अवधारणा पर प्रकाश डाला एवं पण्डित देवनारायण भारतीय के सामाजिक और क्रान्तिकारी कौशल को बहुविषयक शोध पर जोर डाला.

कार्यक्रम में विस्तार डिजिटल से प्रत्यक्ष दुबे ने भारतीय जी पर अनुसंधान की उत्कट संभावनाओं पर जोर देते हुए इतिहासकारों द्वारा किये गए इस छल दुख प्रकट किया.

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