गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, लिखित में बताने होंगे आरोप नहीं तो कर्रवाई मानी जाएगी अवैध

Bhopal: गिरफ्तारी की प्रक्रिया को पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं.
Supreme court

सुप्रीम कोर्ट

Bhopal: गिरफ्तारी की प्रक्रिया को पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं. न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों और गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी लिखित रूप में देना अनिवार्य होगा.

इस केस में सुनवाई के दौरान लिया गया फैसला

यह निर्देश मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में दिए गए फैसले के तहत सामने आया है. कोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी नहीं दी जाती है, तो ऐसी गिरफ्तारी को अवैध माना जा सकता है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि आरोपी को न्यायालय में पेश किए जाने से पहले यह जानकारी देना आवश्यक है तथा उसके परिजनों को भी गिरफ्तारी की सूचना दी जानी चाहिए.

मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय ने जारी किए आदेश

इसी फैसले के पालन में मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय ने राज्यभर के पुलिस आयुक्तों, एसटीएफ, नारकोटिक्स, साइबर सेल और अन्य इकाइयों को निर्देश जारी किए हैं. इन निर्देशों में कहा गया है कि बीएनएस सहित सभी कानूनों के तहत दर्ज मामलों में गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी आरोपी को उसकी समझ में आने वाली भाषा में लिखित रूप में देना अनिवार्य होगा.

पुलिस के लिए व्यावहारिक सहूलियत देने वाला कदम

हालांकि, मध्यप्रदेश पुलिस ने व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपने आदेश में एक लचीलापन भी रखा है. निर्देशों के अनुसार, यदि गिरफ्तार करने वाला अधिकारी किसी कारणवश गिरफ्तारी के समय या उसके तुरंत बाद लिखित रूप में जानकारी देने में असमर्थ होता है, तो वह आरोपी को मौखिक रूप से भी गिरफ्तारी के कारण बता सकता है. इस निर्णय को कानूनी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ पुलिस के लिए व्यावहारिक सहूलियत देने वाला कदम माना जा रहा है.

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