MP News: मध्य प्रदेश में चल रही ‘हरियाली पर आरी’, राज्य में 2026 में 15 लाख पेड़ काटे जाने की योजना

एक ओर प्रदेश के अधिकतर शहरों में हवा की गुणवत्ता (एक्यूआई) लगातार खराब हो रही है, वहीं दूसरी ओर पेड़ों की बेतहाशा कटाई जारी है.
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MP News: राजधानी भोपाल ही नहीं, पूरे मध्य प्रदेश में तमाम विकास प्रोजेक्ट के नाम पर लगातार हरियाली पर आरी चलाई जा रही है. इसमें नए पेड़ों से लेकर 50 से 100 साल तक पुराने हेरिटेज पेड़ों की बलि चढ़ाई जा रही है. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और प्रदेश की ऊर्जा राजधानी सिंगरौली समेत प्रदेशभर में साल 2026 में कुल मिलाकर करीब 15 लाख पेड़ों की बलि दी जानी है. विकास के नाम पर इन पेड़ों को काटने की अनुमति खुद सरकार ने दी है.

NGT ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई

एक ओर प्रदेश के अधिकतर शहरों में हवा की गुणवत्ता (एक्यूआई) लगातार खराब हो रही है, वहीं दूसरी ओर पेड़ों की बेतहाशा कटाई जारी है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब विकास से जुड़ी परियोजनाएं कई साल पहले बनना शुरू हो जाती हैं, तो उनसे प्रभावित होने वाले पेड़ों की कटाई और उसकी भरपाई के लिए होने वाले प्लांटेशन पर भी कई साल पहले से काम शुरू क्यों नहीं होना चाहिए, ताकि पर्यावरण को होने वाले नुकसान को समय रहते कम किया जा सके और इसकी भरपाई की जा सके. हालांकि ऐसा ही मामला भोपाल में भी अयोध्या बायपास का है, जहां 1500 पेड़ अब तक काटे गए हैं. मामला एनजीटी में है, तो फिलहाल रोक लगी हुई है.

मध्य प्रदेश में पेड़ों की सबसे ज्यादा कटाई

पर्यावरण से जुड़े एक्सपर्ट का तो यहां तक कहना है कि ये विकास के नाम पर सरकारी अनुमति से हरियाली की सुनियोजित हत्या है. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की रिपोर्ट बताती है कि मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा ग्रीन कवर कम हुआ है. देशभर में हरियाली बढ़ी है. मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा पेड़ों की कटाई हुई है. वहीं दूसरी तरफ बताया कि इससे पर्यावरण को कितना नुकसान होने वाला है. लोग इलाकों को छोड़कर पलायन करेंगे, क्योंकि वहां पर तापमान बढ़ जाएगा. अभी मध्य प्रदेश में एकलौती जीवन दायनी नदी नर्मदा है जो लगातार बहती है. स्थिति यह हो जाएगी यह सीजनल बन जाएगी. काटे जाने वाले पेड़ों में अधिकांश हेरिटेज ट्री हैं, जो 50 साल से पुराने हैं. इकोलॉजिकल बैलेंस बनाए रखने में इनका सर्वाधिक महत्व है. इनकी कार्बन सोखने की क्षमता सामान्य पेड़ों से कई गुना होती है. इसलिए कार्बन डाई ऑक्साइड सोखकर ऑक्सीजन रिलीज कर यही पेड़ वातावरण ताजगीयुक्त बनाते हैं. इन पेड़ों की संख्या घटने से आबादी क्षेत्रों में ऑक्सीजन की सांद्रता घटती है और प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है.

लगातार कम हो रहे हैं जंगल

इधर, कांग्रेस ने हाई कोर्ट को धन्यवाद देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में लगातार फॉरेस्ट कम होते जा रहे हैं. कांग्रेस ने बीजेपी पर पेड़ कटाई का आरोप लगाया है. वहीं भाजपा ने भी पेड़ कटाई पर पार्टी की तरफ से अपना पक्ष रखा है. उन्होंने कहा कि विकास के लिए जो पेड़ काटे जा रहे हैं. उनसे कई गुना पेड़ लगाने का काम भी किया जा रहा है.

कोल ब्लॉक के लिए 1397.54 हेक्टेयर वन भूमि आवंटित

धिरौली कोल ब्लॉक के लिए 1397.54 हेक्टेयर वन भूमि आवंटित की गई है. इनमें से 1335.35 हेक्टेयर में घना जंगल है. कोल ब्लॉक हासिल करने वाली कंपनी स्ट्राटेक की ओर से अब तक करीब 35 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं. वन विभाग के मुताबिक 5 लाख 70 हजार पेड़ और काटे जाने का अनुमान है. सिंगरौली जिले के वर्किंग प्लान के मुताबिक धिरौली वन क्षेत्र में साल, सरई, सागौन, साजा, हल्दू, धावन, महुआ, कारी, कोसम, जामुन, बहेड़ा, हर्रा, धवई, आंवला समेत कई प्रजातियों के पेड़ों की बहुतायत है.

फोरलेन से अपग्रेड कर 10 लेन बनाया जा रहा

अयोध्या बायपास प्रोजेक्ट में सड़क को फोरलेन से अपग्रेड कर 10 लेन बनाया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट में करीब 7871 पेड़ काटे जाने हैं. इधर मप्र सड़क विकास निगम कोलार बायपास निर्माण करने जा रहा है. इसका भी काफी हिस्सा जंगल से होकर निकलेगा, जिसके लिए 4105 पेड़ काटे जाएंगे. बंगरसिया से भोजपुर तक फोरलेन सड़क निर्माण के लिए 488 पेड़ काटे गए हैं.

इंदौर-उज्जैन रोड 6 लेन हो रहा है. एमपीआरडीसी मौजूदा सड़क के दोनों ओर चौड़ीकरण करेगा, जिसके लिए 3000 पेड़ कटेंगे. इधर इंदौर के रीगल चौराहे पर मेट्रो स्टेशन के लिए 1240 पेड़ काटने की तैयारी है. वहीं ग्वालियर के थाटीपुर रीडेंसिफिकेशन योजना में 3 हजार से अधिक पुराने पेड़ काटे जा चुके हैं. 6700 पेड़ पीडब्ल्यूडी, एमपीआरडीसी और एनएचआई के छोटे प्रोजेक्ट में मिलाकर काटे जाएंगे.

मंडला और डिंडौरी में 5 लाख 40 हजार से ज्यादा पेड़ कटेंगे

मंडला में बसनिया डेम प्रोजेक्ट में पॉवर प्लांट और नहरों का निर्माण होना है. 2107 हेक्टे. वन प्रभावित होंगे. करीब 5 लाख पेड़ कटने का अनुमान है. इधर डिंडौरी में नर्मदा पर राघवपुर बांध प्रोजेक्ट और पॉवर प्लांट बनना है. इससे 12.09 हेक्टे. वन भूमि के करीब 40 हजार पेड़ कटेंगे.

दिल्ली जहरीली हवा के लिए देश भर में चर्चित है. सारे कदम उठाए जा रहे हैं, फिर भी दिल्ली की स्थिति सुधरी नहीं रही है. मध्य प्रदेश में कमोबेश वह स्थिति नहीं है, लेकिन पेड़ों की कटाई की अगर यही स्थिति रही तो दिल्ली अब मध्य प्रदेश से दूर नहीं.

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