Pithori Amavasya 2026: पिठोरी अमावस्या कल, भूलकर भी न करें ये काम, वरना पितर हो सकते हैं नाराज!

Pithori Amavasya Rules: ज्योतिषियों के अनुसार, पिठोरी अमावस्या के दिन कुछ कामों को करने से बचना चाहिए, जबकि कुछ धार्मिक कार्यों को शुभ माना जाता है. आइए जाते हैं इस दिन क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए और पितरों को कौन-सी चीजें अर्पित करनी चाहिए.
Pithori Amavasya

पिठोरी अमावस्या 2026

Avoid Major Ancestral Mistakes: ड्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल पिठोरी अमावस्या 10 सितंबर दिन गुरुवार को मनाई जाएगी. पिठोरी अमावस्या भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है. हिंदू धर्म में इस दिन स्नान, दान और पितरों के लिए तर्ण करने का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पितरों का स्मरण और पूजा करने से उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है. मान्यता के अनुसार, इस दिन पूरे साल पितरों के पूजन और तर्पण में इस्तेमाल होने वाली कुशा एकत्र की जाती है.

ज्योतिषियों के अनुसार, पिठोरी अमावस्या के दिन कुछ कामों को करने से बचना चाहिए, जबकि कुछ धार्मिक कार्यों को शुभ माना जाता है. आइए जाते हैं इस दिन क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए और पितरों को कौन-सी चीजें अर्पित करनी चाहिए.

पिठोरी अमावस्या पर क्या नहीं करना चाहिए?

  • अमावस्या के दिन घर में झगड़ा, विवाद और क्लेश नहीं करना चाहिए. परिवार के सदस्यों से शांतिपूर्वक बात करें और कटु शब्दों का इस्तेमाल करने से बचें.
  • हिंदू धर्म में अन्न को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. इसलिए इस दिन भोजन या अन्न को व्यर्थ फेंकने से बचना चाहिए.
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसी चीजों से परहेज करना चाहिए. इस दिन सात्विक भोजन करना बेहतर माना जाता है.
  • अमावस्या के दिन घर के बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए. किसी गरीब, जरूरतमंद या असहाय व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए.
  • पितरों से जुड़े विशेष कर्मकांड या तर्पण की विधि की पूरी जानकारी न हो तो उसे अपनी तरफ से करने से बचना चाहिए.
  • पारिवारिक परंपरा या योग्य विद्वान की सलाह के अनुसार ही धार्मिक विधि करें.

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पिठोरी अमावस्या पर क्या करना चाहिए?

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा निभाई जा सकती है.
  • स्नान के बाद साफ और स्वच्छ कपड़े पहनें.
  • भगवान का स्मरण करने के साथ अपने पितरों को श्रद्धापूर्वक याद करें.
  • अपनी पारिवारिक परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार पितरों को जल और तिल अर्पित करें.
  • इस दिन जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और तिल जैसी वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है.

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