एशियन पैरा गेम्स में भारत की झोली में एक और गोल्ड, सुवर्णा राज ने डिस्कस थ्रो में जीता स्वर्ण पदक
सुवर्णा राज
Suvarna Raj Wins Gold: एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय एथलीटों का दमदार प्रदर्शन जारी है. इसी कड़ी में पैरा एथलीट सुवर्णा राज ने शानदार प्रदर्शन कर डिस्कस थ्रो में गोल्ड मेडल जीत लिया है. 44 साल की सुवर्णा ने फाइनल में 15.66 मीटर का बेस्ट थ्रो कर पोडियम पर पहला स्थान हासिल किया. इसी के साथ एशियाई पैरा गेम्स में भारत के गोल्ड मेडल की संख्या बढ़कर 15 हो गई है.
सुवर्णा राज ने भारत के लिए जीता गोल्ड
दरअसल गुरुवार 22 अक्बटूबर सुवर्णा राज ने महिलाओं के F54 कैटेगारी इवेंट में हिस्से लेते हुए अपने 6 प्रयासों में से चार बार डिस्कस को 15 मीटर से ज्यादा दूर फेंका. उनका गोल्ड जीतने वाला थ्रो पांचवें प्रयास में आया. बता दें, F54 कैटेगारी में सिर्फ वो दिव्यांग खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जो सिर्फ बैठकर खेल सकते हैं. इसमें रीढ़ की चोट, पोलियो या निचले अंगों की असमानता वाले खिलाड़ी शामिल होते हैं, जिसके शरीर का ऊपरी हिस्सा सक्रिय रहता है.
🇮🇳 GOLDEN GLORY FOR BHARAT! 🥇 Congratulations to Suvarna Raj on securing Gold in the Women’s Discus Throw F54 at the #AsianParaGames2026! #Cheer4Bharat https://t.co/E41MYv2AU9
— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) October 22, 2026
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पिछले एशियन पैरा गेम्स के मुताबिक कैसा रहा इस बार प्रदर्शन
पिछले एशियन पैरा गेम्स के मुताबिक सुवर्णा राज ने इस बार अपने प्रदर्शन में सुधार किया. 2022 में हुए एशियाई पैरा खेलों में उन्होंने F54/F55 वर्ग की स्पर्धा में 15.39 मीटर का थ्रो किया था और उस दौरान वह आठवें स्थान पर रही थीं. इस बार उन्होंने अपने प्रदर्शन पर सुधार कर 15.66 मीटर का थ्रो कर सीधे गोल्ड मेडल पर कब्जा किया है.
सुवर्णा राज के नाम शानदार रिकॉर्ड
सुवर्णा राज के नाम इंटरनेशनल लेवल पर भी शानदार रिकॉर्ड दर्ज हैं. एशियन पैरा गेम्स 2026 में गोल्ड जीतने के पहले उन्होंने इसी साल दुबई में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रों प्री के दौरान महिलाओं की F54/55 डिस्कस थ्रो स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. वहीं, इसी साल जनवरी में ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा ट्रैक मीट में उन्होंने डिस्कस थ्रो में गोल्ड और शॉट पुट में सिल्वर मेडल पर कब्जा किया था. फील्ड पर कमाल दिखाने वाले सुवर्णा ने मैदान से बाहर भी अपने काम से खास पहचान बनाई है. पिछले कई सालों से वह दिव्यांगों के लिए काम कर रही हैं और डिसेबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट के तौर पर कई मुहिम चला चुकी हैं.