‘गाली देना कूल नहीं…’, मनु भाकर का युवाओं को बड़ा संदेश, बोलीं- शब्द ही हमारी पहचान बनाते हैं
मनु भाकर
Manu Bhaker: भारत की स्टार निशानेबाज और ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर ने युवाओं के बीच बढ़ती अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर चिंता जताई है. Gen-Z की अभद्र भाषाओं पर छिड़ी बहस के बीच उन्होंने कहा है कि ‘गाली देना कूल नहीं है.’ इसी के साथ उन्होंने लोगों से अपील की कि वह अपनी भाषा और शब्दों का चयन सोच-समझकर करें.
मनु भाकर के बयान को CJP आंदोलन से जोड़ रहे लोग
दरअसल हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ कुछ प्रदर्शनकारियों ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ है. इसी बीच मनु भाकर की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसे लोग उसी घटना से जोड़ कर देख रहे हैं. हालांकि मनु ने अपने बयान में किसी घटना या संगठन का नाम नहीं लिया.
The language we choose reflects our personality and the kind of person we are. Choose your words wisely, because over time, you become what you think, what you speak, and what you practice.
— Manu Bhaker🇮🇳 (@realmanubhaker) August 2, 2026
Using bad language is not cool. Abusing is not cool.
Let’s keep the definition of cool… pic.twitter.com/8LN53t4V0h
मनु भाकर ने दिया युवाओं को बड़ा संदेश
भारतीय स्टार निशानेबाज मनु भाकर ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. जिसमें उन्होंने लिखा,”हम जिस भाषा का इटेमाल करते हैं, वही हमारी सोच और पर्सनैलिटी को दर्शाती है. अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि अपने शब्द सोच-समझकर चुनिए, क्योंकि वक्त के साथ आप वही बन जाते हैं जो आप सोचते हैं, बोलते हैं और करते हैं.”
मनु भाकर ने बताया कूलनेस का मतलब
मनु भाकर ने अपने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि बुरी भाषा का इस्तेमाल करना या गाली-गलौज करना ‘कूल’ नहीं है. आगे उन्होंने कूल होने का मतलब भी बताया और कहा कि कूल होने का असली मतलब मेहनती होना, दयालु होना, दूसरों और खुद का सम्मान करना, ईमानदारी से सफल होने की कोशिश करना और अपने माता-पिता के साथ देश का नाम रोशन करना है.
अपनी बात को खत्म करते हुए मनु भाकर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह मामला इसलिए उठाया है क्योंकि पिछले कुछ सालों में गाली-गलौज और अभद्र भाषा को देखने का हमारा नजरिया बदल गया है. उनका मानना है कि कई लोग के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना सामान्य हो गया है और वह इसे फैशन समझने लगे हैं.