एडी साइंटिफिक इंडेक्स में एम्स भोपाल के 183 वैज्ञानिक शामिल हैं. इनमें 2 वैज्ञानिक शीर्ष 10 प्रतिशत, 31 शीर्ष 30 प्रतिशत, 66 शीर्ष 50 प्रतिशत और 139 शीर्ष 70 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में हैं.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि नवजात के वार्ड में चूहों की मौजूदगी भी बड़ा खतरा है. चूहें नहीं भी काटें तो भी उनके रहने से बड़ा खतरा रहता है. चूहों का शरीर मल-मूत्र और उनकी लार से बच्चों में संक्रमण फैलना का बड़ा खतरा रहता है.
AIIMS Bhopal: एम्स भोपाल ने इस आयोजन के लिए सभी को आमंत्रित किया है ताकि इस आय़ोजन को सफल बनाया जा सके.
घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है. पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपी को पकड़ लिया जाएगा. हालांकि महिला के साथ इस तरह चेन स्नेचिंग की घटना के बाद एक बार फिर भोपाल एम्स की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं.
नए साल 2026 के लिए भोपाल एम्स ने रोडमैप तैयार किया है. इसके तहत मरीजों के बेहतर इलाज के लिए एम्स में हाईटेक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी.
Bhopal News: पुलिसकर्मी के समझाने पर भी डॉक्टरों ने अभद्र व्यवहार जारी रखा. डॉक्टरों की नशे में इन हरकतों का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया.
सूर्य और चांद की रोशनी के नीचे कम समय बिताने के कारण बच्चों को मायोपिया बीमारी हो रही है. ये बात भापोल AIIMS की एक स्टडी में सामने आई है. मायोपिया को निकट दृष्टि दोष को कहा जाता है. AIIMS के डॉक्टर्स ने 6 हजार बच्चों पर स्टडी की थी.