MP Top Medical Colleges: आज के समय में लाखों की संख्या में छात्र सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लिए NEET जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. NTA द्वारा आयोजित इस परीक्षा को पास करने वाले छात्रों को सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिल जाता है, जिससे वे बहुत ही कम फीस में MBBS की पढ़ाई कर डॉक्टर बनने के अपने सपने को साकार कर सकते हैं. चिकित्सा शिक्षा की तैयारी करने वाले हर छात्र का यही सपना होता है कि उसे एक बार सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल जाए, ताकि वह बहुत ही कम फीस में अपनी पढ़ाई पूरी कर सके. देश के लगभग सभी राज्यों में मेडिकल कॉलेज हैं, जहां एमबीबीएस की पढ़ाई होती है. इसी प्रकार एमपी में भी कई मेडिकल कॉलेज हैं, जहां छात्र एडमिशन लेकर अपनी पढ़ाई कर सकते हैं.
Bhopal AIIMS: सीबीआई की टीम ने भोपाल AIIMS के एक नर्सिंग ऑफिसर को पकड़ा है, जिसने एम्स में भर्ती एक मरीज के परिजन ने ऑपरेशन के एवज में रिश्वत की मांग की थी.
एडी साइंटिफिक इंडेक्स में एम्स भोपाल के 183 वैज्ञानिक शामिल हैं. इनमें 2 वैज्ञानिक शीर्ष 10 प्रतिशत, 31 शीर्ष 30 प्रतिशत, 66 शीर्ष 50 प्रतिशत और 139 शीर्ष 70 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में हैं.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि नवजात के वार्ड में चूहों की मौजूदगी भी बड़ा खतरा है. चूहें नहीं भी काटें तो भी उनके रहने से बड़ा खतरा रहता है. चूहों का शरीर मल-मूत्र और उनकी लार से बच्चों में संक्रमण फैलना का बड़ा खतरा रहता है.
AIIMS Bhopal: एम्स भोपाल ने इस आयोजन के लिए सभी को आमंत्रित किया है ताकि इस आय़ोजन को सफल बनाया जा सके.
घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है. पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपी को पकड़ लिया जाएगा. हालांकि महिला के साथ इस तरह चेन स्नेचिंग की घटना के बाद एक बार फिर भोपाल एम्स की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं.
नए साल 2026 के लिए भोपाल एम्स ने रोडमैप तैयार किया है. इसके तहत मरीजों के बेहतर इलाज के लिए एम्स में हाईटेक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी.
Bhopal News: पुलिसकर्मी के समझाने पर भी डॉक्टरों ने अभद्र व्यवहार जारी रखा. डॉक्टरों की नशे में इन हरकतों का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया.
सूर्य और चांद की रोशनी के नीचे कम समय बिताने के कारण बच्चों को मायोपिया बीमारी हो रही है. ये बात भापोल AIIMS की एक स्टडी में सामने आई है. मायोपिया को निकट दृष्टि दोष को कहा जाता है. AIIMS के डॉक्टर्स ने 6 हजार बच्चों पर स्टडी की थी.