कटनी में 165 बच्चों के मदरसे में रहने के मामले में पहली बार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग(NHRC) खुलकर सामने आया है. प्रियंक कानूनगो ने कहा है कि बच्चों के मौलिक अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.