बीजेपी की अटल सरकार जाने के बाद 2004 में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए ने केंद्र में सरकार बनाई थी. तब वामदल किंग मेकर की भूमिका में थे. लेकिन आज संसद में भी वामदलों के सांसदों की संख्या बेहद सीमित हो गई है, जिसमें आगे चलकर सुधार की संभावना कम नजर आती है.