एक अप्रैल से 30 सितंबर तक चलने वाली इस जनगणना प्रक्रिया में अलग-अलग राज्य अपने हिसाब से तारीखों का निर्धारण कर सकेंगे.
जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिविजन बेंच ने याचिकाकर्ता अनामिका और नेत्रपाल की क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई की. इस दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नैतिकता और सामाजिकता से कानून नहीं चलता है.