समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को अब विधि विभाग को सौंप दिया गया है. विभागीय परीक्षण और आवश्यक संशोधनों के बाद इसे वरिष्ठ सचिव समिति के समक्ष रखा जाएगा. इसके बाद मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिलने पर आगामी मानसून सत्र में विधानसभा में विधेयक पेश किए जाने की संभावना है.