जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के बदले नियम, 2 साल की देरी हुई तो लगाने पड़ेंगे कोर्ट के चक्कर, जानें नया कानून
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के बदले नियम
Delayed Registration Legal Process: जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र सबसे जरूरी डॉक्यूमेंट्स में से एक हैं. हाल ही में संसद के मानसून सत्र के दौरान जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 पेश हुआ, जिसे लोकसभा से मंजूरी मिलने के बाद मंगलवार को राज्यसभा से भी पास करा लिय गया. इस बिल में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़े कुछ जरूरी और महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव किया गया है.
बता दें कि संसद में पेश किए गए इस नए विधेयक का मुख्य मकसद जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों को सख्त बनाना है. ऐसे में आइए जानते है कि जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में क्या बदलाव हुआ है.
जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़ा नया नियम क्या है?
नया विधेयक पास होने और नए नियम लागू होने के बाद यदि कोई व्यक्ति किसी बच्चे के जन्म या किसी व्यक्ति की मृत्यु के 2 साल बाद रजिस्ट्रेशन के लिए जाता है, तो सीधे तौर पर रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकेगा. यानी 2 साल बीत जाने के बाद यदि आप प्रमाण पत्र के लिए किसी भी बड़े सरकारी अधिकारी के पास जाते हैं, तब भी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र का साधारण रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा सकेगा. नए नियमों के अनुसार, दो साल से अधिक की देरी होने पर प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अब ‘फर्स्ट क्लास जुडिशियल मजिस्ट्रेट’ का लिखित आदेश अनिवार्य होगा, तभी जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र का रजिस्ट्रेशन हो सकेगा.
क्या था पुराना नियम?
पुराने नियमों यानी 1969 के मूल अधिनियम के तहत, 1 साल से ज्यादा की देरी वाले मामलों में जिलाधिकारी , SDM या किसी भी कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश से जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र का रजिस्ट्रेशन हो जाता था. लेकिन अब यह नियम पूरी तरह से बदल चुका है. नए नियमों के अनुसार, 2 साल या उससे अधिक की देरी होने पर जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के रजिस्ट्रेशन के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश होना अनिवार्य कर दिया गया है.
2 साल से अधिक की देरी पर कोर्ट का आदेश जरूरी
अगर आप जन्म या मृत्यु के 2 साल बाद रजिस्ट्रेशन कराते हैं, तो अब यह सीधे नहीं होगा. ऐसे मामलों के लिए आपको कोर्ट जाना पड़ेगा और ‘फर्स्ट क्लास जुडिशियल मजिस्ट्रेट’ से लिखित आदेश लेना होगा. इसका मतलब है कि सालों बाद सर्टिफिकेट बनवाने की कानूनी प्रक्रिया अब पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो गई है.
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देर होने पर लगेगा जुर्माना
बता दें कि नए नियमों के अनुसार, जिस्ट्रेशन में देरी करने, गलत जानकारी देने या नियमों का पालन न करने पर अब जुर्माना देना होगा. जुर्माने की राशि और इससे जुड़ी शर्तें नए कानून के तहत तय की जाएंगी.