क्या गांजा पीने वाले दोस्त की शिकायत करने पर सरकार देगी 2 लाख रुपये की इनामी राशि? जानिए सच्चाई
सांकेतिक तस्वीर
2 Lakh Reward Scheme: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक खबर तेजी से फैल रही है, जिसमें कहा जा रहा है कि यदि कोई व्यक्ति गांजा या दूसरी नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले किसी व्यक्ति की जानकारी पुलिस या प्रशासन को देता है, तो उसे 2 लाख रुपये तक का इनाम दिया जाएगा. कुछ पोस्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि अपने दोस्त, पड़ोसी या किसी परिचित की शिकायत करने पर सरकार सीधे 2 लाख रुपये देगी. इस वजह से लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सच में ऐसा कोई नियम लागू हुआ है या नहीं. ऐसे में आइए जनते हैं पूरी सच्चाई के बारे में.
इस दावे की शुरुआत कैसे हुई?
दरअसल, हाल ही में झारखंड सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए एक नई योजना लागू की है. इस नीति के तहत ऐसे लोगों को पुरस्कार देने का प्रावधान किया गया है, जो ड्रग्स की तस्करी, अवैध उत्पादन, सप्लाई चेन या नशे के कारोबार से जुड़ी महत्वपूर्ण और उपयोगी जानकारी सरकार तक पहुंचाते हैं. इसी खबर को सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी के साथ शेयर किया जाने लगा, जिससे लोगों के बीच गलतफहमी फैल गई.
इस योजना का उद्देश्य क्या है?
- झारखंड सरकार की इस नई योजना का उद्देश्य राज्य में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को रोकना और युवाओं को नशे की लत से बचाना है.
- इस नए नियम के तहत यदि कोई व्यक्ति ऐसी सूचना देता है, जिसकी मदद से ड्रग्स तस्करों या अवैध कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई होती है, तो उसे इनामी राशि दी जा सकती है.
- यह व्यवस्था एनडीपीएस एक्ट 1985 के तहत की गई है.
- इनाम की राशि जांच के बाद ही दी जाएगी.
- कुछ विशेष मामलों में यह राशि 2 लाख रुपये या उससे अधिक भी हो सकती है.
क्या केवल गांजा पीने वाले की शिकायत पर मिलेगा 2 लाख रुपये?
- इस योजना को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यही है.
- सरकार की यह नीति केवल किसी व्यक्ति के नशा करने की सूचना देने के लिए नहीं बनाई गई है.
- इसका मुख्य लक्ष्य ड्रग्स तस्करी, अवैध सप्लाई नेटवर्क, बड़े कारोबारी गिरोहों और संगठित अपराध से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना है.
- यदि कोई व्यक्ति सिर्फ व्यक्तिगत लेवल पर गांजा या दूसरी नशीले पदार्थों का सेवन कर रहा है, तो उसकी शिकायत करने भर से 2 लाख रुपये का इनाम मिलना तय नहीं है.
- आमतौर पर इनाम तभी दिया जाता है जब सूचना के आधार पर बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद हों.