LPG संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, घर बैठे लगवाएं बायोगैस प्लांट, जानिए आवेदन करने का आसान तरीका

Biogas Plant: यह योजना उनके लिए है जो बायोगैस के काम से जुड़े हैं. इसके तहत सरकार मशीनें खरीदने के लिए सस्ते दाम पर या आर्थिक मदद दे रही है. इससे गोबर और खेती के कचरे को इकट्ठा करना और इस्तेमाल करना आसान हो जाएगा.
biogas plant

घर बैठे बायोगैस प्लांट लगवाएं

Biogas Plant: मध्य-पूर्व के देशों में चल रहे तनाव के कारण पिछले कुछ महीनों से देशभर में एलपीजी गैस की भारी कमी देखी जा रही है. इसी किल्लत को देखते हुए भारत सरकार ने हाल ही में नागरिकों को राहत देने के लिए एक अहम फैसला लिया है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक नई पहल करते हुए बायोमास एग्रीगेशन मशीनरी (BAM) ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है. इस पहल के तहत देश का कोई भी नागरिक बायोगैस प्लांट लगाने के लिए घर बैठे आवेदन कर सकता है. सरकार का यह फैसला देशभर में चल रहे गैस संकट के बीच बड़ी राहत साबित होगा. आइए जानते हैं बायोगैस प्लांट लगाने के लिए आवेदन करने का आसान तरीका.

कब तक कर सकते हैं आवेदन?

इस योजना के फॉर्म भरने की प्रोसेस 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है और इसकी आखिरी तारीख 30 अप्रैल 2026 है. आपके पास आवेदन के लिए सिर्फ एक महीने का ही वक्त है, इसलिए बिना देरी किए अपना फॉर्म जल्द से जल्द जमा कर दें.

इस योजना का लाभ किसको मिलेगा?

यह योजना उनके लिए है जो बायोगैस के काम से जुड़े हैं. इसके तहत सरकार मशीनें खरीदने के लिए सस्ते दाम पर या आर्थिक मदद दे रही है. इससे गोबर और खेती के कचरे को इकट्ठा करना और इस्तेमाल करना आसान हो जाएगा.

इससे न केवल गैस का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों को भी अपनी बेकार चीजों से ज्यादा कमाई करने का मौका मिलेगा.

आवेदन करने का आसान तरीका क्या है?

  • सबसे पहले आपको BAM पोर्टल (bam.eil.co.in) पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा.
  • इसके साथ ही GOBARdhan योजना के पोर्टल पर भी पंजीकरण करना अनिवार्य है.
  • ध्यान रखें आवेदन तभी स्वीकार किया जाएगा जब आप दोनों पोर्टलों पर रजिस्ट्रेशन पूरा कर लेंगे.
  • इस योजना का लाभ लेने के लिए आपको सरकार के साथ कम से कम 5 साल का एग्रीमेंट करना होगा.

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GOBARdhan योजना क्या है?

यह योजना 2018 में शुरू हुई थी, जिसका मुख्य लक्ष्य गोबर और खेती के कचरे का इस्तेमाल करके बायोगैस, बायो-सीएनजी और जैविक खाद तैयार करना है. इसमें सरकार लागत का 50 प्रतिशत तक हिस्सा सब्सिडी के रूप में खुद देती है, जिससे काम शुरू करने वालों पर पैसों का बोझ काफी कम हो जाता है.

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