Supreme Court: ‘सेकंड क्लास’ शब्द पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, कहा- क्लास कोच की होती है, यात्री की नहीं

Supreme Court: शुक्रवार को हुई एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी यात्री की क्लास उसके पैसों और खर्च से तय नहीं होती है. रेलवे के नियमों में अक्सर 'सेकंड क्लास पैसेंजर' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है.
Supreme Court Railway Order

सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को आदेश दिया

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में रेल यात्रियों से जुड़ा एक जरूरी आदेश जारी किया है. आपने कभी न कभी यह जरूर देखा होगा कि ट्रेन में तीन तरह के एसी कोच होते हैं-फर्स्ट क्लास, सेकंड क्लास और थर्ड क्लास एसी. इसके अलावा, स्लीपर और जनरल डिब्बे अलग होते हैं. हाई क्लास वाले कोच में आर्थिक रूप से मजबूत यात्री सफर करते हैं, वहीं जनरल डिब्बे में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोग यात्रा करते हैं. इन डिब्बों में बैठने वाले यात्रियों को अक्सर लोग ‘सेकंड क्लास के लोग’ जैसे शब्दों से पुकारते हैं. अब इसी शब्दावली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए बड़ा कदम उठाया है.

‘सेकंड क्लास पैसेंजर’ कहना गलत-सुप्रीम कोर्ट

शुक्रवार को हुई एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी यात्री की क्लास उसके पैसों और खर्च से तय नहीं होती है. रेलवे के नियमों में अक्सर ‘सेकंड क्लास पैसेंजर’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है. इसी शब्द पर आपत्ति जताते हुए कोर्ट ने कहा कि ‘सेकंड क्लास’ का संबंध कोच से होना चाहिए न कि यात्री से.

सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा देने का आदेश दिया

इसके अलावा, सुनवाई के दौरान ही सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के एक फैसले को भी पलट दिया. कुछ साल पहले मध्य प्रदेश के एक निवासी की ट्रेन की चपेट में आने से दुर्घटना हो गई थी, जिसके बाद एमपी हाई कोर्ट और रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने परिजनों को मुआवजा देने से मना कर दिया था. अब कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए मृतक के परिवार को मुआवजे के रूप में 8 लाख रुपये देने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि मृतक यात्री के पास टिकट न मिलने मात्र से परिवार को मुआवजे से वंचित नहीं रखा जा सकता है.

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10 साल पहले रेल यात्री की मौत हुई थी

साल 2015 में मध्य प्रदेश के यात्री चंद्रकांत ठक्कर किसी काम से रायपुर से अहमदाबाद जा रहे थे. सफ़र के दौरान अचानक वे अहमदाबाद-हावड़ा मेल से गिर गए और उनकी मृत्यु हो गई. इस दौरान यात्री का बैग भी गायब हो गया था, जिससे रेलवे अधिकारियों को उनका टिकट नहीं मिला और रेलवे ने उन्हें वैध यात्री मानने से इनकार कर दिया. बाद में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी मृतक के परिवार को मुआवजा राशि देने से इनकार कर दिया था. वहीं अब सुप्रीम कोर्ट ने दोनों के फैसले को बदलते हुए चंद्रकांत ठक्कर के परिवार को मुआवजा देने का आदेश दे दिया है.

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