CEO जितेंद्र मिश्रा की एंट्री से राम मंदिर में क्‍या होंगे बदलाव? सबसे पहले खत्‍म होगी ये पुरानी व्‍यवस्‍था

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर में सीईओ की नियुक्ति के बाद कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं. इनमें सबसे बड़ा बदलाव चंदे को लेकर हो सकता है. इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुव‍िधाओं पर भी खास ध्यान रखा जाएगा.

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर को अपना पहला CEO मिल गया है. राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से बुधवार को ऐलान किया गया कि रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा सीईओ होंगे. राम मंदिर निर्माण के बाद से करीब छह साल बाद ट्रस्ट में पहली बार ऐसी व्यवस्था बनने जा रही है, जिसमें मंदिर के रोजमर्रा के संचालन की जिम्मेदारी एक केंद्रीकृत कार्यकारी व्यवस्था के तहत होगी. मतलब यह कि अब सब कुछ पूरे स‍िस्‍टम के तहत ही किया जाएगा.

सीईओ की नियुक्ति के बाद सबसे पहले चढ़ावे की गिनती का सिस्टम बदलने की तैयारी की जा रही है. क्योंकि इसी चढ़ावे में चोरी के आरोप लगे और उसके बाद मंदिर को अपनी व्यवस्था में ही बदलाव करना पड़ा है. अभी नकद दान की गिनती में कर्मचारी ही किया करते थे. अब नोट और सिक्के गिनने के लिए मशीनों के इस्तेमाल पर काम चल रहा है.

ट्रस्ट ने दो बैंकों और IIT के विशेषज्ञों से इसके लिए प्रस्ताव मांगे हैं. हाई-स्पीड नोट काउंटिंग मशीन, ऑटोमेटिक कॉइन काउंटिंग मशीन और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम पर विचार हो रहा है. अगर ऐसा होता है तो चंदे की गिनती पूरी तरह से मशीनों पर शिफ्ट हो जाएगी.

मंदिर के हर स‍िस्‍टम में हो रहा बदलाव

नई व्यवस्था में सिर्फ मशीन से पैसा गिनना ही मकसद नहीं है. चढ़ावा जमा होने से लेकर उसकी गिनती और बैंक में जमा होने तक पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड बनाने का प्‍लान है. CCTV निगरानी के साथ रिकॉर्ड तैयार होने से बाद में किसी भी गड़बड़ी या अंतर की जांच करना आसान होगा. इससे ऑडिट की प्रक्रिया भी ज्यादा व्यवस्थित हो सकेगी. सीधे तौर पर कहा जाए तो जिस तरह के आरोप हाल ही में लगे हैं. उस तरह के आरोप दोबारा न लग सकें. इसी को रोकने के लिए पूरे सिस्टम में ही बदलाव किया जा रहा है.

क्‍या होंगे सीईओ के काम?

सीईओ के जिम्मे कर्मचारियों की तैनाती, रोजमर्रा का प्रशासन, वित्तीय कामकाज, खरीद और टेंडर, IT, सुरक्षा समन्वय और मंदिर की अलग-अलग परियोजनाओं की निगरानी जैसी जिम्मेदारियां रहने की संभावना है. यानी अलग-अलग स्तरों पर बंटी व्यवस्थाओं को एक कमांड के तहत लाने की कोशिश होगी.

जितेंद्र मिश्रा का इन कामों पर रहेगा फोकस

1. मंदिर का रोजमर्रा की व्यवस्था का संचालन

2. सरकार और दूसरी एजेंसियों से तालमेल बनाकर काम करना.

3. मंदिर के पैसे और उससे जुड़ी संपत्तियों का हिसाब रखना,

4. सीईओ की जिम्मेदारी मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर रहेगी.

5. श्रद्धालुओं की सुविधा सबसे अहम रहेगी, ताकि उन्‍हें किसी भी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े.

दर्शन और सुरक्षा व्यवस्था भी निशाने पर

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए दर्शन व्यवस्था को आसान बनाने पर भी काम किया जा रहा है. किस तरह से भक्तों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए. इस बात पर खास फोकस रहने वाला है. जितेंद्र मिश्रा के सैन्य अनुभव को देखते हुए सुरक्षा और अनुशासन उनके कार्यकाल का अहम हिस्सा हो सकता है.

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