Ambikapur नगर निगम के ठेकेदार की मनमानी, बिना अनुबंध किए लगा दिए अवैध होर्डिंग, सड़क पर चलने वालों पर मंडराया खतरा

Ambikapur Municipal Corporation: अंबिकापुर नगर निगम के कमिश्नर डीएम कश्यप का कहना है कि बोर्डिंग लगाने के लिए ठेका हुआ था लेकिन अनुबंध हुआ है या नहीं उन्हें इसकी जानकारी नहीं है.
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अंबिकापुर में लगी अवैध होर्डिंग

CG News: अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र में विज्ञापन के लिए लगाए जाने वाले होर्डिंग का अवैध तरीके से कारोबार चल रहा है. अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र में पिछले दिनों होर्डिंग लगाने के लिए ठेका जारी किया गया. निविदा के बाद 60 होर्डिंग लगाने का ठेका पास हुआ, इसके बाद बिना अनुबंध किए ही ठेकेदार ने 100 से अधिक होर्डिंग चौक चौराहे पर लगा दिया. ठेकेदार की इस मनमानी की वजह से नगर निगम को जहां बिना अनुबंध होर्डिंग लगाने से राजस्व का नुकसान हो रहा है, तो दूसरी तरफ अवैध होर्डिंग लगाने से लोगो की जिंदगी पर भी खतरा मंडरा रहा है.

3 महीने पहले जारी हुआ था टेंडर

अंबिकापुर नगर निगम के द्वारा आज से 3 महीना पहले शहर में होर्डिग लगाने के लिए टेंडर जारी किया गया था. जिसमें एक भाजपा नेता से जुड़े व्यक्ति के फर्म को ठेका मिला. टेंडर के तहत 6 जोन में 60 होर्डिंग लगाया जाना था. इसके लिए पहले डिपॉजिट राशि जमा करना था और फिर एग्रीमेंट करने के बाद ही फर्म के द्वारा होल्डिंग लगाना था. लेकिन ठेकेदार ने नियमों के विपरीत बिना डिपॉजिट राशि जमा किए और बिना अनुबंध के 60 की जगह 100 से अधिक होर्डिंग लगा दिया.

कौन होगा जिम्मेदार?

अवैध होर्डिंग की वजह से बड़ा हादसा होने की संभावना है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन होगा? दूसरी तरफ अवैध होर्डिंग से हर माह 10-12 लाख अवैध कमाई ठेकेदार के द्वारा किया जा रहा है, इसकी जानकारी नगर निगम के अफसरों और कर्मचारियों के साथ जन प्रतिनिधियों को भी है, लेकिन इसके बावजूद मनमानी जारी है.

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नगर निगम कमिश्नर को नहीं कोई जानकारी

इतना ही नहीं, अंबिकापुर शहर की खूबसूरती भी अवैध होर्डिंग की वजह से खराब हो रहीं है. चौक चौराहो पर लगें होर्डिंग के कारण लोक निर्माण विभाग द्वारा लगाए गए संकेतक तक दिखाई नहीं दे रहें हैं और न ही दूसरी जानकारी दिख रही है. कई जगह तो ट्रैफिक सिग्नल तक नहीं दिख रहा है.

अंबिकापुर नगर निगम के कमिश्नर डीएम कश्यप का कहना है कि बोर्डिंग लगाने के लिए ठेका हुआ था लेकिन अनुबंध हुआ है या नहीं उन्हें इसकी जानकारी नहीं है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर नगर निगम के कमिश्नर को ही जब अनुबंध के बारे में पता नहीं है तो फिर नगर निगम की व्यवस्था किस तरह चल रही है. आखिर अंबिकापुर नगर निगम को कौन चला रहा है? शहर के लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ क्यों की जा रही है?

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