G7 मंच पर गूंजेगा मिडिल ईस्ट युद्ध का मुद्दा, ट्रंप-ईरान टकराव के बीच PM मोदी का शांति मंत्र
G7 में शामिल होने पहुंचे पीएम मोदी
G7 Summit: फ्रांस के एवियन शहर में 15 से 17 जून तक होने जा रहे G7 शिखर सम्मेलन में इस बार व्यापार, अर्थव्यवस्था और जलवायु जैसे मुद्दों से ज्यादा पश्चिम एशिया का संकट चर्चा के केंद्र में रहने वाला है. खास तौर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर दुनिया की निगाहें इस बैठक पर टिकी हुई हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे हैं और उनकी कई अहम नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकातें पहले से तय हैं. इनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक भी शामिल है.माना जा रहा है कि दोनों नेता व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और मौजूदा वैश्विक संकटों पर चर्चा कर सकते हैं.
इस बीच अमेरिका की ओर से दावा किया गया है कि ईरान के साथ तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है.अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि समझौते की दिशा में सकारात्मक बातचीत चल रही है और होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं.हालांकि ईरान ने अभी अंतिम समझौते को लेकर सतर्क रुख अपनाया है.
किस बात को लेकर हो देश सहमत
G7 सम्मेलन में पश्चिम एशिया के अलावा यूक्रेन युद्ध, वैश्विक व्यापार असंतुलन, ऊर्जा आपूर्ति और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों की सुरक्षा जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल रहेंगे. लेकिन फ्रांस समेत कई देशों का मानना है कि मौजूदा हालात में मध्य पूर्व की स्थिति सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुकी है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी होंगे शामिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन में भारत के साथ-साथ ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की चिंताओं और अपेक्षाओं को भी सामने रखेंगे. रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि भारत उन देशों की आवाज उठाएगा जो वैश्विक चुनौतियों से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं. लेकिन, निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सीमित रहती है.
ट्रंप से हो सकती है पीएम मोदी की मुलाकात
सम्मेलन के दौरान मोदी की फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी समेत कई नेताओं से मुलाकात होने की संभावना है. इन बैठकों को भारत की कूटनीतिक सक्रियता और वैश्विक भूमिका के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
यदि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ती है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ेगा. ऐसे में G7 शिखर सम्मेलन के नतीजों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है.
ये भी पढ़ें:ईरान ने फिर होर्मुज में किया ड्रोन हमला, अमेरिका ने मार गिराया, CENTCOM का दावा-निशाने पर थे कमर्शियल जहाज