आज शाम से बंद हो जाएंगे MP के सभी टाइगर रिजर्व, पर्यटकों की ‘नो एंट्री’, जानें अब कब से शुरू होगी जंगल सफारी
आज से बंद हो जाएंगे MP के टाइगर रिजर्व
MP Tiger Reserves Closed 2026: देश-विदेश से मध्य प्रदेश के वाइल्डलाइफ भ्रमण के लिए आने वाले पर्यटकों के लिए एक जरूरी खबर सामने आई है. बारिश का मौसम शुरू हो चुका है, इसी बीच मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने एक अहम फैसला लिया है. प्रदेश के सभी 6 मुख्य टाइगर रिजर्व- बांधवगढ़, कान्हा, पेंच, पन्ना, सतपुड़ा और संजय-डुबरी के कोर एरिया आज यानी 30 जून 2026 की शाम तक ही खुले रहेंगे.
इसके बाद कल यानी 1 जुलाई से ये सभी टाइगर रिजर्व 3 महीने के लिए बंद हो जाएंगे. विभाग के अनुसार, इन सभी वन्यजीव पर्यटन स्थलों के गेट 1 अक्टूबर 2026 को पुनः खोल दिए जाएंगे, जिसके बाद पर्यटक फिर से सफारी का आनंद ले सकेंगे.
10 लाख से अधिक पर्यटकों ने की जंगल सफारी
मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल देश-विदेश से भारी संख्या में पर्यटक टाइगर रिजर्व के भ्रमण के लिए आए. इसी वजह से पिछले सीजन के मुकाबले इस सीजन में पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई. अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, लगभग 10 लाख से भी ज्यादा लोग बाघ और दूसरे जंगली जानवरों को देखने के लिए दूर-दूर से आए.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 2,00,000 से भी ज्यादा पर्यटक जंगल सफारी के लिए आए, जो कि दूसरे रिजर्व के मुकाबले सबसे अधिक संख्या मानी जा रही है. वहीं कान्हा, पेंच, पन्ना, सतपुड़ा और संजय-डुबरी सहित अन्य छह बड़े टाइगर रिजर्व में 8,00,000 से भी अधिक पर्यटक वन्यजीव और बाघ देखने के लिए आए.
तीन महीने बंद रहेंगे वन्यजीव पार्क
मानसून के समय जुलाई, अगस्त और सितंबर में पर्यटकों की आवाजाही बंद रहने से बाघों और अन्य जंगली जानवरों को शांत माहौल मिलेगा. इस तीन महीने के दौरान टाइगर रिजर्व प्रबंधन सफारी के रास्तों को ठीक करेगा, पर्यटकों की सुविधाओं को सुधारेगा और जंगल की सुरक्षा को और मजबूत करेगा. यह समय जंगली जानवरों के प्रजनन और उनकी प्राकृतिक गतिविधियों के लिए बहुत जरूरी माना जाता है. जंगल में इंसानों की एंट्री न होने से जानवरों को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होगी और वे पूरे जंगल में आजादी से घूम सकेंगे.
मानसून में पार्क बंद होने की वजह
बांधवगढ़ के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि बारिश में पार्क बंद रखने के दो बड़े कारण हैं. पहला कारण सुरक्षा है, क्योंकि भारी बारिश से जंगल के कच्चे रास्ते खराब हो जाते हैं और सफारी गाड़ियां कीचड़ में फंस सकती हैं. दूसरा कारण यह है कि मानसून के दौरान जंगली जानवर ज्यादा गुस्सैल और आक्रामक हो जाते हैं. इसके साथ ही यह तीन महीने का समय जानवरों के प्रजनन और उनकी प्राकृतिक गतिविधियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जिसमें इंसानी दखल ठीक नहीं माना जाता.