श्योपुर में एम्बुलेंस से पेट्रोल-डीजल के परिवहन का आरोप, मरीजों की सेवा या अवैध कारोबार? जांच की मांग तेज

Sheopur Ambulance Fuel Smuggling: एम्बुलेंस जैसी आवश्यक सेवा से जुड़े वाहन का इस प्रकार उपयोग किया जाना अत्यंत गंभीर विषय है. ग्रामीणों का आरोप है कि यदि किसी मरीज को एम्बुलेंस की आवश्यकता पड़ जाए और वाहन किसी अन्य कार्य में लगा हो, तो मरीज की जान भी जोखिम में पड़ सकती है.
Sheopur Ambulance Fuel Smuggling

श्योपुर में एम्बुलेंस से पेट्रोल-डीजल के कथित अवैध परिवहन का आरोप

रिपोर्ट- हेमकुमार तिवारी (श्योपुर)

Illegal Fuel Transportation Sparks Probe: श्योपुर जिले के बरगवां थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि श्रीरामकृष्ण विवेकानंद सेवा कुटीर एनजीओ की एक एम्बुलेंस का उपयोग मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के बजाय पेट्रोल और डीजल के कथित अवैध परिवहन के लिए किया जा रहा है. मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और स्थानीय लोग पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस एम्बुलेंस का उपयोग आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए होना चाहिए, उसी वाहन में पेट्रोल और डीजल का परिवहन किया जा रहा है. लोगों का कहना है कि एम्बुलेंस होने के कारण इस वाहन को रास्ते में सामान्य वाहनों की तुलना में कम रोका जाता है और कई जगह बिना जांच के ही निकल जाने दिया जाता है. इसी वजह से यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह न केवल कानून का उल्लंघन होगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर जनता के विश्वास के साथ भी बड़ा खिलवाड़ माना जाएगा.

मरीजों की जान के साथ खिलवाड़

ग्रामीणों का कहना है कि एम्बुलेंस जैसी आवश्यक सेवा से जुड़े वाहन का इस प्रकार उपयोग किया जाना अत्यंत गंभीर विषय है. उनका आरोप है कि यदि किसी मरीज को उसी समय एम्बुलेंस की आवश्यकता पड़ जाए और वाहन किसी अन्य कार्य में लगा हो, तो मरीज की जान भी जोखिम में पड़ सकती है. यही कारण है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच आवश्यक मानी जा रही है.

अधिकारियों ने जांच कराने की बात कही

इस मामले को लेकर जब परिवार श्रीरामकृष्ण विवेकानंद सेवा कुटीर एनजीओ के अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार की कोई शिकायत सामने आई है तो उसकी जांच कराई जाएगी. हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि संबंधित एम्बुलेंस किसके नियंत्रण में संचालित हो रही थी, उसमें पेट्रोल-डीजल ले जाने की अनुमति किसने दी थी और यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी.

इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो रहे हैं. क्या एम्बुलेंस का उपयोग वास्तव में स्वास्थ्य सेवाओं के बजाय अन्य कार्यों में किया जा रहा था? यदि हां, तो यह कार्य किसके निर्देश पर किया गया? क्या संबंधित विभाग और प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच करेंगे? यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो क्या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी?

दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि एम्बुलेंस जैसे संवेदनशील वाहन का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए, संबंधित वाहन के संचालन रिकॉर्ड, जीपीएस, ड्यूटी रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाए तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.

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निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग

फिलहाल यह मामला आरोपों के आधार पर सामने आया है और संबंधित एजेंसियों द्वारा इसकी आधिकारिक पुष्टि या खंडन किया जाना बाकी है. अब सभी की निगाहें प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं. यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होती है तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी. वहीं यदि जांच में लापरवाही बरती गई तो एम्बुलेंस की आड़ में कथित अवैध गतिविधियों के आरोपों पर सवाल लगातार उठते रहेंगे.

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