Morena: श्मशान तक नहीं बना पक्का रास्ता, कंधों पर शव लेकर कीचड़ से गुजरते हैं ग्रामीण, बारिश में खुली विकास के दावों की पोल

Morena News: मुरैना जिले की जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत नावली बड़ागांव के ग्राम गड़ुआ जाटव का पुरा में बरसात के दौरान मूलभूत सुविधाओं का अभाव एक बार फिर उजागर हुआ है.
People struggling for a paved road

पक्की सड़क के लिए परेशान लोग

रिपोर्ट – मनोज शर्मा

Morena News: मुरैना जिले की जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत नावली बड़ागांव के ग्राम गड़ुआ जाटव का पुरा में बरसात के दौरान मूलभूत सुविधाओं का अभाव एक बार फिर उजागर हुआ है. गांव में न तो व्यवस्थित श्मशान घाट है और न ही अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता. लगातार हो रही बारिश के कारण पूरा मार्ग कीचड़ और जलभराव से भर गया है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

अंतिम यात्रा बनी चुनौती

मंगलवार रात गांव निवासी श्री छविराम का आकस्मिक निधन हो गया. बुधवार को अंतिम संस्कार के लिए जब परिजन और ग्रामीण शव लेकर श्मशान की ओर निकले, तो उन्हें कीचड़ और दुर्गम रास्ते से होकर गुजरना पड़ा. बरसात के कारण हालात इतने खराब थे कि अंतिम यात्रा निकालना भी किसी चुनौती से कम नहीं रहा. ग्रामीणों को शव को कंधों पर उठाकर फिसलन भरे रास्ते से गुजरना पड़ा.

वर्षों से अधूरी है मांग

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से श्मशान घाट और वहां तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क बनाने की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई. बरसात के मौसम में हर वर्ष ऐसी ही परेशानी का सामना करना पड़ता है, जिससे ग्रामीणों में लगातार नाराजगी बनी हुई है.

प्रशासन से की स्थायी समाधान की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि गांव में शीघ्र श्मशान घाट का निर्माण कराया जाए तथा वहां तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता बनाया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को अपने प्रियजन के अंतिम संस्कार के समय ऐसी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े.

विकास के दावों पर उठे सवाल

सरकार भले ही ग्रामीण विकास और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन गड़ुआ जाटव का पुरा की तस्वीर उन दावों की हकीकत बयां करती नजर आ रही है. बरसात के दौरान श्मशान तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता न होना आज भी ग्रामीणों के लिए एक बड़ी समस्या बना हुआ है, जिससे विकास के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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