‘मॉब लिंचिंग से बचने के लिए ड्रेस बदलें’, पूर्व IAS नियाज खान की पोस्ट पर छिड़ी बहस

Ex IAS Niyaz Khan Controversy: पूर्व IAS नियाज खान ने मॉब लिंचिंग से बचने के लिए मुसलमानों को ड्रेस और हुलिया बदलने की सलाह दी है. उनकी इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.
नियाज खान

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Niyaz Khan Mob Lynching Post: मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी नियाज खान की एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि भारत में मुसलमानों की जितनी भी मॉब लिंचिंग हुई है, उनमें अधिकतर पीड़ित कुर्ता, पायजामा, दाढ़ी और टोपी जैसी पारंपरिक पहचान वाले पहनावे में थे. उन्होंने दावा किया कि ऐसे कपड़ों से उनकी पहचान आसानी से हो जाती है.

नियाज खान ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि मॉब लिंचिंग से बचने के लिए मुसलमानों को अपना ड्रेस और हुलिया बदल लेना चाहिए. उन्होंने तुर्की के मुसलमानों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि लोग सामान्य आधुनिक कपड़े पहनें तो उनकी धार्मिक पहचान छिपी रहेगी और वे संभावित हिंसा से बच सकते हैं.

नियाज खान की पोस्‍ट के बाद छ‍िड़ी बहस

नियाज खान की इस टिप्पणी के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कुछ लोगों ने इसे सुरक्षा के लिहाज से दी गई व्यावहारिक सलाह बताया, जबकि कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि हिंसा रोकने के बजाय पीड़ित समुदाय को अपनी पहचान बदलने की सलाह देना उचित नहीं है. कई लोगों का कहना है कि कानून-व्यवस्था मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है, न कि किसी समुदाय को अपनी वेशभूषा बदलने की सलाह देने की.

पहले भी दे चुके इस तरह के बयान

नियाज खान पहले भी अपने बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में रह चुके हैं. मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रहे खान कई बार धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं. सेवा के दौरान भी उनके कई बयान सुर्खियों में आए थे. हाल के वर्षों में उन्होंने विभिन्न विषयों पर लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिस पर अक्सर समर्थन और विरोध दोनों देखने को मिलता है.

मॉब लिंचिंग को लेकर चर्चा तेज

देश में मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर पहले भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस होती रही है. अलग-अलग राज्यों में हुई घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट भी केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसी घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने की आवश्यकता जता चुका है. ऐसे माहौल में नियाज खान की यह पोस्ट एक बार फिर पहचान, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर नई चर्चा का विषय बन गई है.

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