सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल पर बातचीत के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने पिया पानी, रांची में छात्रों का प्रदर्शन जारी

JPSC JSSC CGL Exam Protest in Ranchi: छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो JPSC, JSSC CGL और कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे.
devendra Nath Mahto

देवेंद्र नाथ महतो ने भूख हड़ताल खत्म की.

Devendra Mahato Ends Hunger Strike: झारखंड के रांची में JPSC, JSSC-CGL और दूसरी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे. आज उनके भूख हड़ताल का चौथा दिन था. इस दौरान महतो पानी भी त्याग दिए थे. आज एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से बातचीत करते हुए उनके पानी पीने की अपील की. जिसके बाद महतो ने पानी पिया, लेकिन उनका अनशन जारी रहेगा.

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, “हम 25 जुलाई से सत्याग्रह कर रहे हैं. मैं 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठा हूं. मैं बहुत थक गया था. यह एक नाजुक समय था. यहां 26 सालों से पेपर लीक हो रहे हैं. कल डॉक्टर ने चेतावनी दी थी कि अगर मैंने पानी नहीं पिया, तो मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा.”

छात्र नेता से बातचीत के दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा, “कृपया थोड़ा पानी पी लीजिए, यह आत्महत्या जैसा है. आपको कुछ समय चाहिए, लेकिन इसमें 2-3 हफ्ते भी लग सकते हैं और मुझे उम्मीद है कि सरकार बात समझेगी और सही फैसला लेगी.” इस दौरान छात्र नेता ने शर्त रखी कि वे तभी अपना अनशन खत्म करेंगे. जब सोनम वांगचुक खुद रांची आकर उनसे मुलाकात करेंगे.

ये भी पढ़ेंः JPSC-JSSC में सुधार की मांग को लेकर सड़क पर छात्र! 7 अगस्त के विधानसभा मार्च से पहले महतो की तबीयत खराब

12 दिनों से चल रहा आंदोलन

बता दें, रांची में आज छात्रों के आंदोलन का 12वां दिन है. छात्र रांची में JPSC, JSSC-CGL और दूसरी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में अनशन पर बैठे हैं. आज सोनम वांगचुक ने छात्र नेता महतो से बातचीत करते हुए कहा कि अनशन का मकसद खुद को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि गहरी नींद में सोई सरकार को जगाना है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा महात्मा गांधी भी अनशन के दौरान पानी में नींबू मिलाकर लेते थे. वांगचुक की अपील के बाद महतो पानी पीने के लिए तैयार हो गए.

ज़रूर पढ़ें