Guna: पत्नी पूर्व MLA, पति ST सर्टिफिकेट से बने DSP, रघुवीर सिंह मीना पर केस दर्ज

Guna News: पुलिस मुख्यालय के निर्देश के बाद पूर्व IPS रघुवीर सिंह मीना के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. उन पर आरोप है कि जाति प्रमाणपत्र का गलत तरीके से इस्तेमाल किया. डीएसपी से लेकर जिला पंचायत सदस्य भी बन गए.
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पूर्व आईपीएस रघुवीर सिंह मीना, पूर्व एमएलए ममता मीना

Guna News: पूर्व IPS रघुवीर सिंह मीना की मुश्किलें बढ़ने वाली है. भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय के निर्देश के बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है. उन पर आरोप है कि जाति प्रमाणपत्र का गलत तरीके से इस्तेमाल किया. डीएसपी से लेकर जिला पंचायत सदस्य भी बन गए.

मीना पर क्या आरोप लगे हैं?

पूर्व IPS पर आरोप है कि उन्होंने अनुसूचित जनजाति (ST) का फर्जी तरीके से सर्टिफिकेट हासिल किया. इसके बाद मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा दी और DSP की नौकरी हासिल की. आरोप है कि इससे पहले उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के प्रमाणपत्र के सहारे सरकारी टीचर की नौकरी की.

इसके साथ ही उन पर आरोप है कि उन्होंने साल 2022 में OBC आरक्षित सीट से जिला पंचायत के सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ा. मीना के खिलाफ फ्रॉड, आपराधिक षड्यंत्र सहित कई मामलों में शिकायत दर्ज की गई है.

कौन हैं रघुवीर सिंह मीना?

रघुवीर सिंह मीना मूल रूप से गुना जिले के चाचौड़ा स्थित अजगरी गांव के रहने वाले हैं. ओबीसी वर्ग का जाति प्रमाणपत्र हासिल करके सरकारी टीचर की नौकरी की. साल 1984 में उन्होंने मूल निवास प्रमाणपत्र विदिशा जिले का बनवाया. इसके बाद अनुसूचित जनजाति वर्ग का सर्टिफिकेट बनवाया और MPPSC की परीक्षा देकर DSP बन गए. साल 2001 में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का अधिकारी बना दिया गया. इसके बाद उन्हें बड़वानी और आगर-मालवा में पुलिस अधीक्षक बनाया गया.

इसके बाद रीवा और गुना में कमांडेंट रहे. साल 2005 वीरता और 2009 में उत्कृष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया. साल 2021 में वे रिटायर हो गए. OBC प्रमाणपत्र के सहारे उन्होंने गुना जिला पंचायत के वार्ड-16 से चुनाव जीता और सदस्य बने.

पत्नी ममता मीना बीजेपी विधायक रहीं

रघुवीर सिंह मीना की पत्नी ममता मीना साल 2013 से 2018 के बीच बीजेपी से विधायक रहीं. साल 2000 से 2005 तक गुना जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं. साल 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया था लेकिन वे हार गई थीं.

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सर्टिफिकेट अमान्य घोषित

राघौगढ़ में रहने वाले हरवीर सिंह रघुवंशी ने साल 2016 में इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी. ये मामला जाति प्रमाणपत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति के पास पहुंचा. कमेटी ने पुराने रिकॉर्ड को खंगाला और सर्टिफिकेट को अमान्य घोषित कर दिया.

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