न बड़े शहर का सहारा, न कोई खास पहचान… हुनर के दम पर शंघाई तक पहुंचे अजय, अब PM मोदी से की मुलाकात

Ajay Ahirwar: अजय को विश्व कौशल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले युवाओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आवास पर मुलाकात करने का अवसर मिला.
Ajay Ahirwar met PM Narendra Modi.

पीएम नरेंद्र मोदी से मिले अजय अहिरवार

Ajay Ahirwar: मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के पुरैना गांव के रहने वाले अजय अहिरवार ने अपने हुनर के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचकर एक मिसाल पेश की है. अजय को विश्व कौशल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले युवाओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आवास पर मुलाकात करने का अवसर मिला. उन्होंने चीन के शंघाई में आयोजित वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता में ब्रिकलेइंग यानी ईंटों की चिनाई के क्षेत्र में भारत का प्रतिनिधित्व किया.

अजय की यह उपलब्धि बताती है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या खास पृष्ठभूमि की मोहताज नहीं होती. सही प्रशिक्षण, लगातार मेहनत और मार्गदर्शन मिले तो छोटे गांवों से निकलने वाले युवा भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं.

आईटीआई की पढ़ाई से निखारा कौशल

10 नवंबर 2005 को जन्मे अजय ने तकनीकी शिक्षा को अपने करियर का आधार बनाया. उन्होंने आईटीआई से मेसन ट्रेड की पढ़ाई की, जहां उन्हें निर्माण कार्य, ईंटों की चिनाई और इससे जुड़ी तकनीकों का प्रशिक्षण मिला. इसी दौरान उन्होंने अपने कौशल को बेहतर बनाने और इस क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने की दिशा में काम किया.

कानपुर में की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी

अजय की तैयारी में कानपुर स्थित YPSVEF की अहम भूमिका रही. यहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता को ध्यान में रखते हुए नियमित और अनुशासित अभ्यास किया. प्रशिक्षण के दौरान काम में सटीकता, तय समय में लक्ष्य पूरा करने और हर चरण में गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया. इन प्रयासों ने उन्हें प्रतियोगिता की चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद की.

क्या है ब्रिकलेइंग का काम?

ब्रिकलेइंग को आमतौर पर ईंटें जोड़कर दीवार बनाने का काम समझा जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिताओं में इसकी बारीकियां काफी महत्वपूर्ण होती हैं. इसमें तकनीकी ड्रॉइंग के अनुसार सही माप लेना, ईंटों को उचित क्रम में लगाना, संरचना का संतुलन बनाए रखना और निर्धारित समय में बेहतरीन परिणाम देना शामिल है. छोटी-सी चूक भी पूरी संरचना की गुणवत्ता और डिजाइन को प्रभावित कर सकती है. इसलिए इस काम में अनुभव के साथ एकाग्रता, गति और तकनीकी दक्षता की जरूरत होती है.

अजय ने विशेषज्ञ और मेंटर मनोज कुलश्रेष्ठ के मार्गदर्शन में अपनी तैयारी को आगे बढ़ाया. उनके प्रशिक्षण में तकनीकी क्षमताओं को निखारने के साथ प्रतियोगिता के दबाव में भी बेहतर प्रदर्शन करने पर जोर दिया गया.

शंघाई में भारत का प्रतिनिधित्व करना रहा खास अनुभव

शंघाई में भारत का प्रतिनिधित्व करना अजय के लिए अपने कौशल को वैश्विक स्तर पर परखने का महत्वपूर्ण अनुभव रहा. इस दौरान उन्हें अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक मानकों को समझने और दूसरे देशों के प्रतिभागियों के काम करने के तरीकों से सीखने का अवसर मिला. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का मौका उनकी इस यात्रा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया. अजय का सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो तकनीकी शिक्षा और अपने हुनर के सहारे आगे बढ़कर देश और दुनिया में पहचान बनाना चाहते हैं.

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