Damoh: पटवारी का गजब कारनामा, पक्के मकान की जगह सिस्टम पर दिखा दी धान की फसल, किसान हुए परेशान
दमोह: पटवारी और सर्वेयर ने पक्के मकान को बताया धान का खेत
Damoh News: MP के दमोह में सरकारी सिस्टम की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे. यहां पटवारी और सर्वेयर ने किसान के खेत में नहीं, बल्कि पक्के मकान के खसरे में धान की फसल उगा दी. अब सवाल ये है कि जब खेत ही नहीं रहा, तो किसान अपनी फसल कहां से दिखाए और बैंक का कर्ज कैसे चुकाए?
क्या है पूरा मामला?
मामला दमोह जिले की तेंदूखेड़ा तहसील के अमवाही गांव का है. जहां 60 वर्षीय महिला किसान हक्को बाई के नाम दर्ज खसरा नंबर 289 पर पक्का मकान बना हुआ है लेकिन सरकारी गिरदावरी के आंकड़ों में इसी खसरे पर धान की फसल दर्ज कर दी गई.
किसान राम सिंह पाल का आरोप है कि पटवारी और सर्वेयर की मिलीभगत से उनके मकान वाले खसरे में धान की गिरदावरी चढ़ा दी गई. फसल बोने के लिए उन्होंने बैंक से कर्ज लिया था लेकिन गलत गिरदावरी के चलते फसल का पंजीयन ही नहीं हो सका.
किसान ने लगाए आरोप
किसान का दर्द ये है कि अगर खेत में फसल होती तो उसे बेचकर बैंक का कर्ज चुकाया जा सकता था. लेकिन अब सवाल ये है कि जिस खसरे में फसल कागजों में उगाई गई है, उस जमीन पर पक्का मकान खड़ा है. फसल होती तो व्यापारी को बेच देता या फिर बैंक में भर देता लेकिन व्यापारी मकान तो खरीदेगा नहीं.
इतना ही नहीं रामसिंग पाल का आरोप है कि ये समस्या सिर्फ उनके गांव तक सीमित नहीं है बल्कि तेंदूखेड़ा से लेकर तारादेही, झलोन, सर्रा क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में किसानों ने मक्का बोया है लेकिन आरोप है कि गिरदावरी में मक्के की जगह धान दर्ज कर दी गई है. वहीं तेंदूखेड़ा हल्का पटवारी ने जमीन पर खड़े पक्के मकान के खसरों पर भी धान उगा दी है.
सिस्टम पर उठ रहे सवाल
क्या मौके पर जाकर गिरदावरी की गई? अगर की गई, तो मकान के खसरे में धान कैसे दर्ज हो गई? और अगर मौके पर जांच नहीं हुई, तो फिर सरकारी आंकड़े किस आधार पर तैयार किए गए? किसानों का आरोप है कि आंकड़े दुरुस्त दिखाने के चक्कर में जमीन पर कुछ और और सरकारी रिकॉर्ड में कुछ और दर्ज कर दिया गया.
फिलहाल किसान की मांग है कि गिरदावरी रिकॉर्ड की जांच हो. गलती सुधारकर फसल का पंजीयन कराया जाए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो क्योंकि सवाल सिर्फ एक किसान का नहीं है. सवाल ये है कि अगर सरकारी रिकॉर्ड में ही खेत की फसल बदल जाएगी, तो किसान अपने हक की फसल आखिर कहां तलाशेगा?
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वहीं, हरदुआ पांजी गांव के रहने वाले किसान कृष्णा यादव का आरोप है कि उनके गांव में एक भी किसान ने मूंग की फसल नहीं बोई लेकिन पटवारियों ने 50 से ज्यादा किसानों के खसरों में मूंग की फसल चढ़ा दी है. वर्तमान में खेतों में मक्का की फसल खड़ी हुई है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड कह रहा है कि किसान ने मूंग की फसल बोई है, कैसे? किसानों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.