इंदौर में जल संकट पर कैलाश विजयवर्गीय की बड़ी बैठक, MLA मालिनी गौड़ बोली- बैठक का क्या फायदा, काम नहीं होते
मालिनी गौड़ और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय
Indore News: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में गर्मी आने से पहले ही पानी को लेकर खतरे की घंटी बजने लगी है. इस बार मानसून की बेरुखी ऐसी रही कि सामान्य से करीब 14 इंच कम बारिश दर्ज हुई और अब इसका असर शहर की जल व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है. नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, शहर के करीब 85 हजार परिवारों की पानी की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं.
52 हजार से ज्यादा घरों तक नर्मदा का पानी नहीं पहुंच रहा, जबकि 33 हजार से ज्यादा परिवार टैंकरों के भरोसे हैं. सवाल ये है कि जब गर्मी अभी आई ही नहीं, तो आने वाले महीनों में इंदौर की प्यास कैसे बुझेगी? और सबसे बड़ा सवाल, जब शहर में जलसंकट की आहट पहले से थी, तो जल प्रबंधन की तैयारियां कहां थीं?
जल संंकट हजारों परिवारों की हकीकत
इंदौर में पानी का संकट अब सिर्फ आशंका नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की हकीकत बनता जा रहा है. नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट ने शहर की जल व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने रखी है, जो आने वाली गर्मियों को लेकर चिंता बढ़ाती है. रिपोर्ट के मुताबिक, 52 हजार 262 घरों तक अलग-अलग कारणों से नर्मदा का पानी नहीं पहुंच रहा है. वहीं, 33 हजार 37 परिवार ऐसे हैं, जिन्हें अपनी पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. यानी शहर के करीब 85 हजार परिवारों के सामने पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. कम बारिश के बीच अब सवाल सिर्फ पानी की कमी का नहीं, बल्कि मौजूदा संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का भी है.
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने की बैठक
जलसंकट की इसी चुनौती के बीच कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में जल प्रबंधन को लेकर बड़ी बैठक की. बैठक में पानी की उपलब्धता, सप्लाई और आने वाले समय की तैयारियों पर मंथन हुआ. लेकिन शहर की जल समस्या पर चर्चा के लिए बुलाई गई इस अहम बैठक में विधायकों की गैरमौजूदगी ने भी सवाल खड़े कर दिए. इंदौर शहर के पांच विधायकों में से दो विधायक बैठक में मौजूद नहीं रहे. इनमें गोलू शुक्ला और पूर्व महापौर एवं वर्तमान विधायक मालिनी गौड़ के नाम सामने आए. ऐसे वक्त में, जब हजारों परिवार पानी के लिए परेशान हैं, जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी और जवाबदेही भी चर्चा का विषय बन गई है.
मालिनी गौड़ ने कसा तंज
सबसे दिलचस्प बात ये है कि जल प्रबंधन को लेकर सवाल विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्तापक्ष के भीतर से भी उठ रहे हैं. पूर्व महापौर और वर्तमान विधायक मालिनी गौड़ ने बैठक को लेकर अपनी ही सरकार पर तंज कस दिया. उनका कहना था कि ऐसी बैठक का क्या फायदा, जहां काम ही नहीं होते. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब इंदौर में पानी की समस्या को लेकर चिंता बढ़ रही है. सवाल यह है कि क्या बैठकें सिर्फ समीक्षा और चर्चा तक सीमित रह जाएंगी, या फिर जमीन पर भी इसका असर दिखाई देगा? आखिर जब नगर निगम का सर्वे ही हजारों परिवारों की परेशानी सामने रख रहा है, तो जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही कौन तय करेगा?
33 हजार परिवार टैंकरों के भरोसे
इंदौर को स्वच्छता में लगातार अपनी पहचान पर गर्व रहा है, लेकिन अब शहर के सामने एक ऐसी चुनौती है, जिसका सीधा संबंध हर घर और हर परिवार से है. एक तरफ 52 हजार से ज्यादा घरों तक नर्मदा की पाइपलाइन का पानी नहीं पहुंच रहा, दूसरी तरफ 33 हजार से ज्यादा परिवार टैंकरों के भरोसे हैं. कम बारिश ने संकट की आशंका बढ़ा दी है और जनप्रतिनिधियों के बयान ने जल प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना होगा कि निगम की सर्वे रिपोर्ट के बाद कितने परिवारों तक पानी पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं. क्योंकि इंदौर में अब सवाल सिर्फ पानी का नहीं, वादों, व्यवस्थाओं और जवाबदेही का भी है.
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