MP में 3 साल में खत्म होगा ड्रग्स नेटवर्क, तस्करों की 446 करोड़ की संपत्ति अटैच, कॉलेजों में बनेंगी एंटी ड्रग समितियां
सांकेतिक तस्वीर
MP News: मध्य प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार पर अब निर्णायक प्रहार की तैयारी है. राज्य सरकार ने अगले दो से तीन वर्षों में ड्रग्स के पूरे अवैध नेटवर्क को ध्वस्त करने का लक्ष्य तय किया है. मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने संबंधित विभागों को इस दिशा में गंभीरता से काम करने और अभियान का असर समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं.
गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित पांचवीं राज्य स्तरीय एनसीओआरडी बैठक में मादक पदार्थों की तस्करी, जब्ती, विनष्टीकरण, नशामुक्ति और जनजागरूकता अभियान की विस्तृत समीक्षा की गई. बैठक में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, विभागाध्यक्ष और पुलिस व नारकोटिक्स विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.
नशे के खिलाफ तीन साल का विशेष अभियान
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभाग तीन वर्षीय अभियान के लिए अपने आंतरिक लक्ष्य निर्धारित करें और स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करें. उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रदेश में नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई की गई, उसी तरह मादक पदार्थों के पूरे अवैध नेटवर्क को खत्म करने के लिए भी समन्वित प्रयास किए जाएं. ड्रग्स नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सूचना तंत्र मजबूत करने के साथ नारकोटिक्स वर्टिकल, विशेष शाखा और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया.
500 से अधिक विद्यार्थियों वाले संस्थानों में बनेंगी एंटी ड्रग समितियां
सरकार शिक्षण संस्थानों को भी नशे के खिलाफ अभियान से जोड़ेगी. शुरुआत में 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग समितियों का गठन किया जाएगा. इनमें शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी, उच्च शिक्षा विभाग, सामाजिक न्याय विभाग और पुलिस के प्रतिनिधि शामिल होंगे. इन समितियों के नोडल अधिकारी स्थानीय पुलिस थाने के बीट प्रभारी होंगे.
सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में नशामुक्त विद्यालय अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं. विद्यार्थियों और शिक्षकों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाएगा. नशे के कारोबार से संबंधित सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी. इसके लिए नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है.
दो साल में 2.74 लाख किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट
बैठक में बताया गया कि मादक पदार्थों के विनष्टीकरण में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर है. वर्ष 2025 में 2,073 प्रकरणों में कुल 1,44,025 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए. वहीं, वर्ष 2026 में 30 सितंबर तक 2,756 प्रकरणों में 1,30,380 किलोग्राम मादक पदार्थों का विनष्टीकरण किया गया. इस तरह दोनों वर्षों में कुल 2,74,405 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए. इसके अलावा 30 सितंबर 2026 तक एनडीपीएस एक्ट के 2,986 मामलों में 4,091 आरोपियों से 50,933 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं.
446 करोड़ की संपत्ति अटैच, 18 गुप्त प्रयोगशालाएं ध्वस्त
अवैध मादक पदार्थों के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई भी की गई है. वर्ष 2025 में एनडीपीएस के 54 मामलों में 300 करोड़ रुपये और वर्ष 2026 में 38 मामलों में 146 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई. इस तरह कुल 446 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई हुई है.
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025-26 के दौरान मध्य प्रदेश पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, राजस्व आसूचना निदेशालय और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने प्रदेश में मादक पदार्थों की 18 गुप्त प्रयोगशालाओं को ध्वस्त किया. इसके अलावा सितंबर 2026 तक एनडीपीएस के 201 विशेष मुकदमों की निगरानी की गई. इसी अवधि में न्यायालयों में लंबित मामलों में आठ में दोषसिद्धि हुई.
मुख्य सचिव ने रासायनिक कारखानों में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर रसायनों के अवैध इस्तेमाल और डायवर्जन को रोकने के निर्देश दिए. उद्योग, श्रम, स्वास्थ्य और गृह विभाग को निगरानी तंत्र या विशेष दस्ता तैयार करने तथा औद्योगिक समूहों और उद्योग संगठनों की सूची साझा करने को कहा गया है.
कोडीन आधारित कफ सिरप के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण नेटवर्क की लगातार निगरानी की जाएगी.
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को केंद्र सरकार से समन्वय कर इसकी जानकारी जुटाने और लाइसेंस प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही, फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला को भेजे गए एनडीपीएस नमूनों की जांच रिपोर्ट 15 दिन के भीतर प्राप्त करने के लिए कार्ययोजना बनाने को कहा गया है.
सभी जिलों में नशामुक्ति केंद्र स्थापित करने की तैयारी
सामाजिक न्याय विभाग को उन जिलों से 31 अक्टूबर तक प्रस्ताव प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां अभी नशामुक्ति केंद्र नहीं हैं. सरकार का लक्ष्य प्रदेश के सभी जिलों में नशामुक्ति केंद्र स्थापित करना है. वर्तमान में सामाजिक न्याय विभाग के 31 और स्वास्थ्य विभाग के 10 नशामुक्ति केंद्र संचालित हैं. नशामुक्त घोषित क्षेत्रों की जानकारी संबंधित कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के साथ साझा करने के निर्देश भी दिए गए.
जागरूकता अभियान में 2.58 करोड़ लोगों की भागीदारी
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में मादक पदार्थों के सेवन के खिलाफ जागरूकता के लिए 30,339 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें करीब 2.58 करोड़ लोगों ने भाग लिया. ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान को भी बेहतर जनभागीदारी मिली है. सोशल मीडिया के माध्यम से सामग्री को 58 करोड़ से अधिक बार देखा गया, जबकि करीब 10 हजार युवाओं को विभिन्न खेल गतिविधियों से जोड़ा गया.
मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को कार्रवाई, निगरानी, जनजागरूकता और नशामुक्ति सेवाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए. सरकार का लक्ष्य तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के साथ युवाओं को नशे से दूर रखना और नशे की लत से प्रभावित लोगों को उपचार व पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराना है.
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