Bhopal News: भोपाल के अयोध्या नगर के बाद शाहपुरा थाने पर साइबर अटैक, डेटा को किया इन्क्रिप्ट
सांकेतिक तस्वीर
Bhopal Crime News: मध्य प्रदेश के भोपाल में साइबर ठगों और सेंधमारी करने वालों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं. अभी तक अयोध्या नगर पुलिस थाने पर हुए रेंसमवेयर अटैक की जांच सुलझ नहीं पाई है. शहर के एक और थाने को साइबर अटैकर्स ने निशाना बनाया है. हमलावरों ने पूरे डेटा को इन्क्रिप्ट या लॉक कर दिया है.
संवेदनशील जानकारी से छेड़छाड़
दरअसल, ये पूरा मामला शाहपुरा थाने का है. जहां साइबर ठगों ने सेंधमारी की है. हफ्ते भर के अंदर दूसरे थाने पर हुए साइबर अटैक से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है. कम्प्यूटर की प्रभावित हार्ड डिस्क को जांच के लिए साइबर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम को दे दिया गया है. वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस स्टेशनों के कंप्यूटर तक साइबर अटैकर्स की पहुंच बताती है कि वे शुरुआती मकसद में कामयाब हो गए हैं. इससे आगे या CCTNS नेटवर्क तक अपराधी पहुंचते हैं तो केस डायरी और संवेदनशील सबूतों से आसानी से छेड़छाड़ कर सकते हैं.
क्या है CCTNS सिस्टम?
इसका पूरा नाम क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैंकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम है. इसे भारत सरकार के गृह विभाग के तहत संचालित किया जाता है. इसे राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ऑपरेट करता है. इसे साल 2009 में मिशन मोड पर लाया गया था. इसकी मदद से पुलिस विभाग की कार्रवाई को बेहतर बनाने में मदद मिलती है. कानून और व्यवस्था, ट्रैफिक मैनेजमेंट और रिसोर्स मैनेजमेंट जैसे अन्य क्षेत्रों में पुलिस वर्क ऑर्डर में सुधार आता है. इसके साथ ही क्रिमिनल का डेटा रिकॉर्ड पर रखा जाता है, जिससे अपराधियों को पकड़ने में मदद मिलती है.
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CCTNS कैसे काम करता है?
- FIR और दर्ज शिकायतों की जानकारी डिजिटल फॉर्मेट में रखी जाती है.
- संबंधित अपराध के बारे में जुटाई गई जानकारियों को सिस्टम में दर्ज किया जाता है.
- अलग-अलग थानों के बीच सूचनाओं और जानकारियों का आदान-प्रदान किया जाता है.
- इसके साथ ही अदालती कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज डिजिटली तौर पर व्यवस्थित रखे जाते हैं.