CG High Court: हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में लगभग दो दशक पुराने रिश्वत मामले में आरोपी को बरी कर दिया है. न्यायमूर्ति रजनी दुबे की एकलपीठ ने सीबीआई कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को निरस्त करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष रिश्वत मांग और स्वीकार को संदेह से परे सिद्ध नहीं कर पाया.
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनकी पत्नी ने कानूनी प्रतिनिधि के रूप में अपील को आगे बढ़ाया.
CG News: हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और मानवीय फैसला सुनाते हुए कहा कि नक्सली हमलों में गंभीर रूप से घायल हुए जवानों को उनकी शारीरिक अक्षमता के बावजूद फिर से संवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात करना अनुचित है. न्या
CG News: बिलासपुर में बजरंग दल व हिंदू संगठनों ने आज ढोल बाजे के साथ आतिशबाजी करते हुए जमकर जश्न मनाया और धर्मांतरण के खिलाफ लाए गए कठोर कानून का स्वागत किया.
CG News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल रायपुर में सीटी स्कैन और गामा कैमरे की खरीदी और स्थापना से संबंधित कथित भ्रष्टाचार के मामले में, दोषी कर्मियों के विरुद्ध FIR दर्ज करने की याचिका खारिज कर दी है.
CG Transfer News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अनुशंसा पर रजिस्ट्रार जनरल ने प्रदेश के न्यायिक अधिकारियों का तबादला आदेश जारी किया है.
CG High Court: मामले के अनुसार, ग्राम हसौद, तहसील हसौद जिला सक्ती निवासी किसान लक्ष्मण कुमार चंद्रा ने अधिया (बटाई) के आधार पर खेती की थी. खरीफ सीजन 2025-26 में उनकी 3.78 हेक्टेयर कृषि भूमि किसान पोर्टल पर पंजीकृत थी. सहकारी समिति हसौद द्वारा उन्हें 196 क्विंटल धान बेचने के लिए टोकन भी जारी किया गया था.
CG High Court: सरकार ने कोर्ट को बताया कि फायर स्टेशन बनाने के लिए उपयुक्त जमीन नहीं मिल रही. कई जगह जो जमीन मिल रही है, वह शहर से बहुत दूर है, जिससे आपात स्थिति में रिस्पॉन्स टाइम बढ़ जाता है.
CG News: बिलासपुर के सरकंडा क्षेत्र में रहने वाले कुछ नाबालिग और युवकों ने लग्जरी गाड़ी खरीदने के लिए ऐसा प्लान बनाया, जिसने सबको हैरान कर दिया. युवकों ने अपने ही घरों से जेवर चोरी कर उन्हें बेचकर थार खरीदने की योजना बनाई थी. योजना के तहत एक युवक अपने घर से जेवर चुराकर भी ले आया, लेकिन उसके दोस्तों ने ही उसे धोखा दे दिया.
Bilaspur: हाई कोर्ट ने दत्तक पुत्र होने के दावे से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए कहा है कि केवल पंजीकृत दत्तक पत्र (एडॉप्शन डीड) होने से गोद लेने की प्रक्रिया स्वतः सिद्ध नहीं हो जाती.