लंबी बीमारी के बाद 79 वर्षीय सत्यपाल मलिक ने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांस ली.
जब यह विवाद बढ़ा, तो प्रेमानंद महाराज ने इसका जवाब भी अपनी अगली कथा में दे दिया. उन्होंने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा, "जो लोग गंदे आचरण करते हैं, उन्हें सही बात बुरी लगती है. जैसे नाली का कीड़ा नाली में ही खुश रहता है. अगर उसे अमृत कुंड में डाल दो, तो वह बेचैन हो जाएगा. "
चिराग पासवान और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के बीच हुई तारीफों के आदान-प्रदान ने भी अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है. दोनों ही नीतीश सरकार के आलोचक हैं. हालांकि, चिराग ने साफ कर दिया है कि उनकी पहली प्राथमिकता NDA है, लेकिन इन मुलाकातों से भविष्य में किसी नए गठबंधन की संभावना को नकारा नहीं जा सकता.
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक 20 साल के युवक के अकाउंट में 36 डिजिट में रकम ट्रांसफर हुई. जब उसने SMS देखा तो नंबर भी नहीं गिन पाया और उसके होश उड़ गए. उसके अकाउंट को फ्रीज कर दिया गया है. जानें पूरा मामला-
राम रहीम को बार-बार मिल रही पैरोल पर कई सवाल उठ रहे हैं. विपक्ष और कई सामाजिक संगठन सरकार पर यह आरोप लगाते हैं कि राम रहीम को चुनावी फायदे के लिए बार-बार रिहा किया जा रहा है.
हर साल अगस्त में यहां सुरक्षा इतनी सख्त होती है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता. कई स्तरों की चेकिंग, ड्रिल्स, और हाई-टेक निगरानी होती है. लेकिन इस बार, एक और घटना ने सबको चौंका दिया.
5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून संसद में पारित कराकर जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दिया गया था.
Supreme Court on Rahul Gandhi: राहुल गांधी के साल 2022 के बयान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा में विपक्ष के नेता को कड़ी फटकार लगाई है.
एक वक्त था जब बिहार की सियासत में कांग्रेस का सिक्का चलता था. 1950 से 1980 के दशक तक कांग्रेस ने बिहार में कई बार सरकार बनाई. स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती दशकों में कांग्रेस का संगठन इतना मजबूत था कि बिहार की जनता उसे सत्ता का पर्याय मानती थी. लेकिन 1990 के दशक से कांग्रेस का सियासी सूरज धीरे-धीरे ढलने लगा.
अगर उम्मीदवार बिहार से हुआ, तो NDA के सहयोगी जैसे जेडीयू और एलजेपी धर्म संकट में फंस सकते हैं. इसी तरह, अगर उम्मीदवार आंध्र प्रदेश से आया, तो टीडीपी और जनसेना के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. यह विपक्ष की ऐसी चाल है, जिससे NDA को अपने कुनबे को एकजुट रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी.