Jagdalpur: नर्सिंग कॉलेज की थाली में बार-बार निकल रहे कीड़े! 260 छात्राएं खाना छोड़ने को मजबूर

Jagdalpur: छात्राओं के मुताबिक, जब तक एग्जाम खत्म होंगे तब तक आखिर वे खाएंगी क्या. उनका आरोप है कि कई छात्राएं मेस का खाना छोड़कर बाहर से फल, बिस्किट, ओट्स और दूसरी खाने की चीजें मंगाकर गुजारा कर रही हैं.
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जगदलपुर

Jagdalpur: जगदलपुर के महारानी अस्पताल परिसर में चल रहे शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय में इन दिनों पढ़ाई से ज्यादा चर्चा छात्रों की थाली की हो रही है. वजह है मेस का खाना और उस खाने में बार-बार मिल रहे कीड़े. यहां 260 से ज्यादा छात्राएं नर्सिंग की पढ़ाई कर रही हैं, लेकिन छात्रों का आरोप है कि जिस मेस के खाने पर उन्हें निर्भर रहना है, वही खाना अब उनके लिए परेशानी का कारण बन गया है.

छात्राओं का क्या कहना है ?

छात्रों का कहना है कि कभी दाल में कीड़ा मिलता है, कभी सब्जी में. कभी चावल कच्चे मिलते हैं, और शिकायत करने के बावजूद व्यवस्था में कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ.छात्राओं का आरोप है कि उन्होंने एक-दो बार नहीं, बल्कि कई बार मेस संचालक और कॉलेज प्रबंधन से शिकायत की. लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है. उनका कहना है कि शिकायत के बाद भी कार्रवाई को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है और अब उन्हें एग्जाम के बाद व्यवस्था सुधारने की बात कही जा रही है.

छात्राओं के मुताबिक, जब तक एग्जाम खत्म होंगे तब तक आखिर वे खाएंगी क्या. उनका आरोप है कि कई छात्राएं मेस का खाना छोड़कर बाहर से फल, बिस्किट, ओट्स और दूसरी खाने की चीजें मंगाकर गुजारा कर रही हैं.मेस प्रभारी और थर्ड सेमेस्टर की छात्रा टीना मंडावी का आरोप है कि उन्होंने अन्य मेस प्रभारियों के साथ मिलकर प्राचार्य से कई बार शिकायत की.

उनके मुताबिक नया मेस तलाशने के लिए कहा गया और जब नया विकल्प लेकर प्रबंधन के पास पहुंचे तो उन्हें टिफिन और खाने की जांच कराने की बात कही गई. टीना का कहना है कि जब उन्होंने बताया कि पहले भी जांच कराई जा चुकी है, तो उन्हें एग्जाम के बाद देखने की बात क्यों कही गई.

खाद्य सामग्री के रखरखाव पर भी सवाल उठाए

उनका आरोप है कि फ्रिज में पुरानी सब्जी रखे होने की बात सामने आई और जब साफ-सफाई के लिए गरम पानी से खाद्य सामग्री धोकर बनाने की बात कही गई, तो इसके लिए भी गैस उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी छात्रों पर डाल दी गई. 2021 में जब मेस के लिए 2100 रुपये लिए जाते थे, तब भी खाने में कीड़े मिलने की शिकायत थी और अब 2300 रुपये देने के बावजूद स्थिति में बदलाव नहीं आया है.

वहीं सेकंड ईयर की छात्रा अंकिता का कहना है कि शिकायतें काफी समय से की जा रही हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ इंतजार करना पड़ रहा है. छात्रा का आरोप है कि ज्यादातर छात्र मेस में खाना नहीं खा रहे हैं और बाहर से फल या दूसरी चीजें मंगाकर पेट भरना पड़ रहा है.

वहीं थर्ड ईयर बीएससी नर्सिंग की छात्रा जिज्ञासा कुर्रे ने खाने में कीड़े मिलने को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. जिज्ञासा का कहना है कि कई बार दाल या सब्जी में कीड़ा निकलता है. जब वे मेस संचालक को इसकी जानकारी देती हैं तो कथित तौर पर उसे कीड़ा मानने के बजाय कभी जीरा तो कभी जली हुई प्याज बताया जाता है.

छात्राओं ने की ये मांग

छात्राओं की मांग है कि मेस बदला जाए और उन्हें साफ-सुथरा और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराया जाए.शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय की प्राचार्य तृप्ति सोनी का कहना है कि उन्हें खाने में कीड़े मिलने की शिकायत तीन-चार दिन पहले मेस प्रभारियों के जरिए मिली थी. उनके मुताबिक, छात्रों की मांग मेस बदलने की है और इसके लिए नियमानुसार प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

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