Jagdalpur: प्रधानमंत्री आवास पर सवालों का पहाड़! 1600 आवेदन में 1200 रिजेक्ट, आखिर गरीबों का सपना क्यों टूटा?

Jagdalpur: प्रधानमंत्री आवास योजना में गरीबों को पक्का घर देने का दावा अब सवालों के घेरे में दिखाई दे रहा है. आइए जानते है क्या है पूरा मामला
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फाइल फोटो

Jagdalpur: प्रधानमंत्री आवास योजना में गरीबों को पक्का घर देने का दावा अब सवालों के घेरे में दिखाई दे रहा है. जगदलपुर नगर निगम में आवेदन और आवंटन के आंकड़ों को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने हैं. एक ओर नगर निगम का दावा है कि 2036 आवेदन स्वीकृत हुए और 1855 मकानों पर काम शुरू हो चुका है. वहीं विपक्ष का आरोप है कि करीब 1600 आवेदन आए, लेकिन लगभग 1200 आवेदन विभिन्न कारणों से रिजेक्ट या होल्ड पर चले गए.

जरूरतमंद परिवार अब भी अपने आशियाने का इंतजार

यानी बड़ी संख्या में जरूरतमंद परिवार अब भी अपने आशियाने का इंतजार कर रहे हैं. दस्तावेजों की कमी, अगस्त 2015 से पहले का निवास, वोटर आईडी, स्थानीय निवास प्रमाण पत्र, जनगणना में नाम और तीन लाख रुपये से कम आय का प्रमाण जैसी शर्तें कई आवेदकों के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गईं. योजना के तहत 346 मकान तैयार बताए जा रहे हैं, जबकि 303 हितग्राहियों को ही अब तक आवंटन मिल सका है और 116 मकान अभी भी निर्माणाधीन हैं.

धरमपुरा और देवकी क्षेत्र में आवास तैयार होने के बावजूद कई पात्र परिवार अब भी सूची और आवंटन का इंतजार कर रहे हैं. हितग्राहियों को करीब 10 प्रतिशत अंशदान यानी लगभग 38 हजार रुपये जमा करना पड़ता है, जबकि सब्सिडी के बाद भी मकान की लागत करीब 3 लाख रुपये तक पहुंच रही है.

गरीबों के लिए सबसे बड़ी दीवार

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सख्त दस्तावेजी प्रक्रिया वाकई पारदर्शिता के लिए है या फिर गरीबों के लिए सबसे बड़ी दीवार बन चुकी है? अब नगर निगम दावे कर रहा है तो दूसरी तरफ दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया भी जारी है. ऐसे में यह देखना होगा कि हजारों आवेदनों में बड़ी संख्या में रिजेक्शन की जिम्मेदारी आखिर किसकी है और बेघर परिवारों का घर का सपना कब पूरा होगा?

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