CG News: बेंगलुरु में खदान हादसा, पत्थर की चट्टान गिरने से छत्तीसगढ़ के मजदूर की मौत, परिजनों ने प्रशासन से लगाई गुहार

CG News: रोजगार की तलाश में कर्नाटक गए छत्तीसगढ़ के मरवाही क्षेत्र के पंडरी गांव निवासी मजदूर धर्मेश सिंह की बेंगलुरु के पास एक पत्थर खदान में हुए हादसे में मौत हो गई.
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बेंगलुरु में खदान हादसा

CG News: रोजगार की तलाश में कर्नाटक गए छत्तीसगढ़ के मरवाही क्षेत्र के पंडरी गांव निवासी मजदूर धर्मेश सिंह की बेंगलुरु के पास एक पत्थर खदान में हुए हादसे में मौत हो गई. बताया जा रहा है कि काम के दौरान अचानक पत्थर धसकने से वह इसकी चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई.

इस हादसे में अब तक छत्तीसगढ़ के एक मजदूर समेत कुल सात मजदूरों की जान जा चुकी है. घटना की खबर मिलते ही परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है और गांव में मातम का माहौल है. पीड़ित परिजनों ने प्रशासन से सहायता और उचित कार्रवाई की मांग की है.

बेंगलुरु के खदान हादसे में पेंड्रा के युवक की मौत

गुरुवार को कर्नाटक के बेंगलुरु में पत्थर की खदान धसकने से बड़ा हादसा हो गया, जिसमें सात मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए घटना. घटना में बेंगलुरु के मडापट्टना गांव की है.

मृत मजदूरों में एक मजदूर छत्तीसगढ़ के पेंड्रा जिले के पंडरी का 25 वर्षीय युवक धर्मेश सिंह मार्को भी है, जो ब्लास्टिंग कंपनी की ओर से उदय शंकर क्रेशर परिसर में पत्थरों में ड्रिलिंग का कार्य कर रहा था. तभी ऊपर रॉकब्रेकर मशीन ने लापरवाही पूर्वक मशीन चलाते हुए मजदूरों के ऊपर के पत्थरों में रॉक ब्रेकर मशीन चला दी. जिससे पहाड़ से पत्थर गिरकर नीचे काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरा. हादसे के बाद घटनास्थल पर काम कर रहे पेंड्रा क्षेत्र के दूसरे मजदूरों ने मलबा हटाने के बाद कपड़ों से मृतक की पहचान की. जिसके बाद इसकी सूचना धर्मेश के परिजनों को दी.

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परिजनों का बुरा हाल, प्रशासन से लगाई गुहार

घटना की सूचना मिलते ही परिवार में मातम पसर गया, धर्मेश आखिरी बार होली के समय अपने गांव आया था. धर्मेश पिछले 5 सालों से कर्नाटक काम करने जाता था. धर्मेश का परिवार काफी गरीब है, इसलिए उसकी इच्छा थी कि वह वहां से पैसे कमा कर यहां अपना घर बनाएगा. घटना ने पूरे परिवार को तोड़ कर रख दिया है. धर्मेश के बूढ़े मां-बाप अब अपने बेटा अंतिम दर्शन करना चाहते हैं. उनके शासन प्रशासन से मांग है कि उनके बेटे का मृत शरीर उनके गांव लाया जाए, ताकि वह आदिवासी रीति रिवाज से उसका अंतिम संस्कार कर सके.

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