बिलासपुर HC ने राजनांदगांव कलेक्टर का 48 साल पुराना फैसला रद्द किया, जानें क्या है पूरा मामला

Bilaspur: याचिकाकर्ताओं ने कलेक्टर के 13 जून 2022 के आदेश को चुनौती दी थी. जिसमें उनका कहना था कि 3 नवंबर 1978 को उनके खिलाफ एकतरफा आदेश पारित किया गया था. कार्रवाई से पहले न ही उन्हें कोई नोटिस दिया गया और न ही कोई सार्वजनिक सूचना दी गई
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हाई कोर्ट

Bilaspur: छत्तीसगढ़ से बड़ी खबर सामने आ रही है. बिलासपुर हाईकोर्ट ने जमीन के मालिकाना हक से जुड़े विवाद में राजनांदगांव कलेक्टर के आदेश को निरस्त कर दिया है. इस आदेश में छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 57(2) के तहत पेश आवेदन पर सुनवाई करने से इनकार किया गया था.

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, राजनंदगांव के बांसपाईपारा निवासी बसंत लाल की मौत के बाद उनकी कानूनी वारिस शशि बाला लाल, शिशिर लाल और कीर्ति लाल तथा शिरीष लाल ने याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ताओं ने कलेक्टर के 13 जून 2022 के आदेश को चुनौती दी थी. याचिका में याचिकाकर्ताओं का कहना था कि 3 नवंबर 1978 को उनके खिलाफ एकतरफा आदेश पारित किया गया था.

कार्रवाई से पहले न ही उन्हें कोई नोटिस दिया गया और न ही कोई सार्वजनिक सूचना दी गई.बाद में उन्होंने राज्य शासन और निजी पक्ष के बीच जमीन के स्वामित्व से जुड़े विवाद के निराकरण के लिए धारा 57(2) के तहत कलेक्टर के सामने आवेदन पेश किया. लेकिन कलेक्टर ने सुनवाई करने से मना कर दिया. जिसके बाद याचिकाकर्ता हाई कोर्ट पहुंचे. हाई कोर्ट ने मामले को सुनने के बाद कलेक्टर के आदेश को गलत माना और उसे निरस्त कर दिया.

कलेक्टर को दिए निर्देश

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि 15 दिनों के भीतर राजनांदगांव कलेक्टर के सामने उपस्थित हों. हाई कोर्ट ने कहा है कि, कलेक्टर को सभी जरूरी और संबंधित पक्षों को सुनवाई और अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर देना होगा. यही नहीं कोर्ट ने कलेक्टर को कहा है कि 60 दिनों के भीतर कानून के अनुसार निपटारा करें.

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